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Rama Devi Sahu

152 days ago

🌹राम राम जी । नाम का प्रभाव ।🌹 भगवान् के नाम का बढ़ा भारी प्रभाव है, जिससे पापी के पापों का नाश हो जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि खूब पाप करो। जो यह समझकर पाप करता है, वह नाम के रहस्य को नहीं समझता। जो पुरुष यह समझता है कि पाप कर लो, भजन करके पाप का नाश कर लेंगे, यदि इस आभास से पाप करने लगे तो नाम पाप की वृद्धि हेतु हो गया। यह नाम का रहस्य समझना है। नाम की ओट में पाप करना भगवान् का अपराध है। पूर्व के पापों के लिये क्षमा माँग ले और भविष्य में पाप न करने की प्रतिज्ञा कर ले तो पूर्व के पापों की माफी है -ऐसा न्याय है। नाम में बड़ा भारी रहस्य भरा है। नाम का तत्त्व, नाम का गुण, नाम का प्रभाव समझ में आ जाय तो नाम छूट नहीं सकता। निरन्तर जप चलता ही रहता है छोड़ नहीं सकता, फिर बेड़ा पार है। स्वामी सत्यानंद जी महाराज का कहना है कि -- भगवान भक्ति और भक्त के बीच में ही रहते है। अपने मन को इधर उधर न भटकाकर अपने निराकार राम को ध्याना सबसे उतम धर्म है । जिसे संतों ने सत्य कहा है, ओंकार कहा है, वह राम नाम ही है। भक्ति के अन्दर भावना, नियम धर्म. शुभकार्य, जप, तप, संयम, साधना और ईश का नाम सभी का समन्वय है। भक्ति के बगैर किए गए सब कार्य व्यर्थ है । जैसे जिस पेङ के नीचे आग जल रही हो तो उस पर बेल नही चढा करती। ऐसे ही जिसके मन में छल कपट हो वहाँ पर भक्ति नही टिका करती । श्रद्धा व निश्चयहीन में भी भक्ति का अंकुर नही फूटा करता । वह परमात्मा ज्योतिर्मय है। उसके रूप का ध्यान प्रतिदिन सुबह शाम करें । जय श्री राम।

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