
RAJPUT
133 days ago
जय सियाराम ! एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बड़ी श्रद्धा से पूजा-पाठ किया करता था। एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा-"राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ। बोलो तुम्हारी कोई इच्छा है ?" प्रजा को चाहने वाला राजा बोला- "भगवन मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। आपकी कृपा से राज्य में सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक इच्छा है कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।" यह तो सम्भव नहीं है। भगवान ने राजा को समझाया। परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से जिद्द करने लगा। आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पड़ा और वे बोले-"ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास लाना। मैं पहाड़ी के ऊपर से दर्शन दूँगा।" राजा अत्यन्त प्रसन्न हुआ और भगवान को धन्यवाद दिया अगले दिन सारे नगर मे ढ़िंढ़ोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुँचे, वहाँ भगवान आप सबको दर्शन देंगे। दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर पहाड़ी की ओर चलने लगा। चलते-चलते रास्ते में एक स्थान पर ताँबे कि सिक्कों का पहाड दिखा। प्रजा में से कुछ एक उस ओर भागने लगे। *तभी ज्ञानी राजा ने सबको सर्तक किया कि कोई उस ओर ध्यान न दे, क्योंकि तुम सब भगवान से मिलने जा रहे हो, इन ताँबे के सिक्कों के पीछे अपने भाग्य को लात मत मारो।★* परन्तु लोभ-लालच में वशीभूत कुछ प्रजा ताँबे के सिक्कों वाली पहाड़ी की ओर भाग गयी और सिक्कों की गठरी बनाकर अपने घर कि ओर चलने लगे। *वे मन ही मन सोच रहे थे, पहले ये सिक्कों को समेट ले, भगवान से तो फिर कभी मिल लेंगे।* राजा खिन्न मन से आगे बढ़े। कुछ दूर चलने पर चाँदी कि सिक्कों का चमचमाता पहाड़ दिखाई दिया। इस बार भी बची हुई प्रजा में से कुछ लोग, उस ओर भागने लगे और चाँदी के सिक्कों को गठरी बनाकर अपनी घर की ओर चलने लगे। *उनके मन मे विचार चल रहा था कि, ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है। चाँदी के इतने सारे सिक्के फिर मिले न मिले, भगवान तो फिर कभी मिल जायेंगे।* इसी प्रकार कुछ दूर और चलने पर सोने के सिक्कों का पहाड़ नजर आया। *अब तो प्रजाजनों में बचे हुए सारे लोग तथा राजा के स्वजन भी* उस ओर भागने लगे। वे भी दूसरों की तरह सिक्कों की गठरी लाद कर अपने-अपने घरों की ओर चल दिये। *अब केवल राजा और रानी ही शेष रह गये थे।* राजा रानी से कहने लगे- "देखो कितने लोभी हैं ये लोग, *भगवान से मिलने का महत्व★* ही नहीं जानते हैं। भगवान के सामने सारी दुनिया की दौलत क्या चीज है ?" सही बात है- रानी ने राजा की बात का समर्थन किया और वह आगे बढ़ने लगे। कुछ दूर चलने पर राजा और रानी ने देखा कि सप्तरंगी आभा बिखरता हीरों का पहाड़ है। अब तो रानी से रहा नहीं गया, हीरों के आकर्षण से वह भी दौड़ पडी, और हीरों की गठरी बनाने लगी। फिर भी उसका मन नहीं भरा तो साड़ी के पल्लू में भी बाँधने लगी। *वजन के कारण रानी के वस्त्र देह से अलग हो गये, परन्तु हीरों की तृष्णा अभी भी नहीं मिटी।* यह देख राजा को अत्यन्त ग्लानि और विरक्ति हुई। *बड़े दुःखद मन से राजा अकेले ही आगे बढते गये।* पहाड़ पर सचमुच भगवान खडे़ उसका इन्तजार कर रहे थे। *राजा को देखते ही भगवान मुसकुराये और पूछा- "कहाँ है तुम्हारी प्रजा और तुम्हारे प्रियजन। मैं तो कब से उनसे मिलने के लिये बेकरारी से उनका इन्तजार कर रहा हूँ।"* राजा ने शर्म और आत्म-ग्लानि से अपना सर झुका लिया। *तब भगवान ने राजा को समझाया- "राजन जो लोग भौतिक सांसारिक प्राप्ति को मुझसे अधिक मानते हैं, उन्हें कदाचित मेरी प्राप्ति नहीं होती और वह मेरे स्नेह तथा आर्शिवाद से भी वंचित रह जाते हैं।"* 🙏🏻

Comments (6)

RAJPUT
Apr 16, 2026
RADHE RADHE JI 🌹 GOOD MORNING 🌄

बरखा शर्मा
Apr 14, 2026
🙏🌺✨Jay Shree Ram Jay Vir Hanuman ji 🌹Good Evening ji 🙏🌺⚡

nalini pandey 9238736526
Apr 14, 2026
nalini pandey

Radhe 🌹
Apr 14, 2026
Jai Shree Ram 🙏🌷Jai Hanuman 🙏🌹 Good Afternoon Ji 🙏

RAJPUT
Apr 14, 2026
जय श्री महाकाल 🙏 सुप्रभात 🙏

सविता
Apr 14, 2026
Jai Shri Ram 🙏🌹