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Rama Devi Sahu

311 days ago

गोवर्धन पूजा के प्रमुख रिवाज़ और प्रसाद गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है 'अनाज का ढेर'। यह उत्सव आभार व्यक्त करने, प्रकृति और भगवान श्री कृष्ण को धन्यवाद देने का प्रतीक है। 1. गोवर्धन पर्वत बनाना * रिवाज़: इस दिन लोग गाय के गोबर का उपयोग करके गोवर्धन पर्वत का एक छोटा-सा प्रतीकात्मक रूप ज़मीन पर बनाते हैं। पर्वत को फूलों, पत्तों और रंग-बिरंगे दानों से सजाया जाता है। * उद्देश्य: यह उस घटना का स्मरण कराता है जब श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर पर्वत उठाकर वृंदावनवासियों की रक्षा की थी। 2. अन्नकूट भोग * प्रसाद: यह गोवर्धन पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। * इसमें 56 भोग (छप्पन भोग) बनाने की परंपरा है, जिसमें अलग-अलग प्रकार के शाकाहारी व्यंजन (जैसे दाल, चावल, सब्ज़ियाँ, कढ़ी, पूड़ी, मिठाईयाँ) और दही, दूध से बनी चीज़ें शामिल होती हैं। * विशेष व्यंजन: आमतौर पर, भोग में बाजरे की खिचड़ी, कढ़ी-चावल, और विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियाँ (जिन्हें मिक्स करके बनाया जाता है) शामिल की जाती हैं। * उद्देश्य: यह प्रकृति से प्राप्त प्रचुर भोजन के लिए भगवान श्री कृष्ण को धन्यवाद देने का प्रतीक है। यह भोग अंत में भक्तों में वितरित किया जाता है। 3. गायों की पूजा * रिवाज़: चूंकि गोवर्धन पर्वत और श्री कृष्ण दोनों ही गायों और ग्वालों से जुड़े हैं, इसलिए इस दिन गायों को स्नान कराकर, सजाकर और उनका सम्मान किया जाता है। उन्हें मालाएँ पहनाई जाती हैं और विशेष भोजन (जैसे चारा और गुड़) खिलाया जाता है। * उद्देश्य: गायों को हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है और उन्हें लक्ष्मी का स्वरूप भी माना जाता है। उनकी पूजा जीवन को बनाए रखने में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करती है।

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