
Rama Devi Sahu
19 days ago
श्रीराम ने जिस शिव धनुष को एक पल में उठा लिया था, क्या आप जानते हैं कि उसे स्वयंवर सभा तक लाने में कितने लोगों के पसीने छूट गए थे? 🏹 श्रीराम का अतुलनीय बल: स्वयंवर सभा तक कैसे पहुँचा था शिव धनुष? 🚩🏹 रामायण से जुड़ा एक अत्यंत रोचक और अप्रतिम प्रश्न अक्सर पूछा जाता है: "जिस धनुष को भगवान श्रीराम ने सहज ही उठा लिया था, उसे स्वयंवर भवन तक उठा कर कौन लाया था?" इसका उत्तर और प्रमाण स्वयं वाल्मीकि रामायण में विस्तार से मिलता है, जो प्रभु श्रीराम की असीम शक्ति का साक्षात प्रमाण है। 🔹 वाल्मीकि रामायण का मूल श्लोक: जनकेन समादिष्ठाः सचिवाः प्राविशन् पुरम् । तद्धनुः पुरतः कृत्वा निर्जग्मुरमितौजसः ।। नृणां शतानि पंचाशद्व्यायतानां महात्मनाम् । मंजूषामष्टचक्रां तां समूहुस्ते कथंचन ।। 🔹 श्लोक का सरल अर्थ: आदेश और प्रस्थान: महाराज जनक के स्पष्ट निर्देश पर उनके मंत्रियों (सचिवों) ने उस भीतरी कक्ष में प्रवेश किया जहाँ वह दिव्य धनुष रखा था। असीमित शक्ति का प्रयोग: असीमित शक्ति वाले लोग उस धनुष को आगे रखकर कक्ष से बाहर आए। ५,००० महाबली पुरुष: उस धनुष को एक संदूक में रखा गया था, जो आठ पहियों वाली एक विशाल गाड़ी पर था। लगभग 5,000 लंबे और अत्यंत बलशाली पुरुषों ने मिलकर जैसे-तैसे उस गाड़ी को खींचकर सभा तक पहुँचाया। निष्कर्ष: जिस शिव धनुष को हिलाने के लिए ५,००० महाबलियों को अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ी और जिसे बड़े-बड़े योद्धा तिल भर भी नहीं डिगा सके, उसे प्रभु श्रीराम ने एक साधारण धनुष की भाँति उठा लिया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया! 📜 प्रामाणिक स्रोत: वाल्मीकि रामायण, बाल काण्ड, सर्ग 67, श्लोक 3 और 4

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