
Rama Devi Sahu
436 days ago
🙏‼️ Radhey Radhey ‼️🙏 **************************** Dt.20.Jun.2025 (Friday) संत एकनाथ जी ने गंगा में स्नान किया और बाहर आए। जहाँ वे खड़े थे, उसके ठीक ऊपर किसी अधर्मी व्यक्ति का घर था। उस व्यक्ति ने ऊपर से उन पर थूका। एकनाथ जी को अपने ठाकुर जी की सेवा करनी थी, इसलिए वे फिर से स्नान करने चले गए। जब वे वापस आए, तो उस व्यक्ति ने फिर से थूका। उसने इस तरह सौ बार उन पर थूका और एकनाथ जी सौ बार स्नान करने चले गए। जब वे फिर से वापिस आए, तो वह व्यक्ति हार गया। वह आया और उनके चरणों में गिर गया। उसने कहा कि आपने एक बार भी मेरी तरफ ऊपर नहीं देखा। आपने मुझे गाली नहीं दी, आपने गुस्सा भी नहीं किया। एकनाथ जी ने उत्तर दिया कि "भाई, आपने मुझ पर बड़ी कृपा की है। मैं क्रोध क्यों करूँ? मुझे गंगा जी में सौ बार स्नान करने में सौ दिन लगते, परंतु आपकी कृपा से मैंने एक दिन में सौ बार गंगा स्नान का लिया।" संत ऐसे ही सोचते हैं। साधना या जप ऐसे ही पचता है। सोचो, यदि हम में से कोई होता तो *हम तो थोड़ी-सी बात पर ही क्रोधित हो जाते, यही हमारी अपरिपक्वता है।* उस व्यक्ति ने संतों को कष्ट देना हमेशा के लिए बंद कर दिया। वह रोने लगा और बोला, मुझे नहीं पता था कि संत इतने दयालु होते हैं, अब से मैं कभी किसी संत का अपमान नहीं करूंगा। यदि एकनाथ जी प्रतिक्रिया करते, तो उसकी संतों को कष्ट देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती, दुष्ट तो वो था ही। परंतु उन्होंने इसे सहन करने का निर्णय लिया और इस सहनशीलता ने उसे बदल दिया। निष्कर्ष: *नाम जप करना कठिन है, जप को बचाना कठिन है और जप को पचाना कठिन है। ये तीनों ही बातें सत्संग के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैं।* संतों की संगति में हमें जप और अध्यात्म की प्रेरणा मिलती है, इसे कैसे बचाना है और इसे कैसे पचाना है, इसकी भी प्रेरणा मिलती है। भगवान के भक्तों की संगति हमें अध्यात्म का अभ्यास करना, अपनी साधना को बचाना और इसे पचाना भी सिखाती है। 🌹🍂जय श्री रा - राधा म - माधव 🍂🌹
Comments (2)

Suresh Kumar
Jun 20, 2025
राधे राधे जी 🌹🙏🌹

प्रेम कुमार
Jun 20, 2025
🌹🌹 राधे राधे जी 🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन आप का दिन मंगलमय हो 🌹🌹
