
Rama Devi Sahu
58 days ago
🙏🌹श्रीराधा चाहती तो श्रीकृष्ण को रोक सकती थी, गोकुल से जाने के लिए परंतु उन्होंने श्रीकृष्ण को रोका नही उन्हें जाने दिया। वो जानती थी कान्हा अब दुबारा लौट कर नहीं आयेंगे फिर भी उन्होंने कान्हा को रोका नही। अगर वो कान्हा को रोक देती तो कान्हा कंसा का वध नही कर पाते , मथुरा के राजकुमार नही बनते ना कभी द्वारिकाधीश बन पाते। बड़े लक्ष के खातिर श्रीराधा और कान्हा एक दूसरे से दूर हुए इसलिए श्रीराधा पूजनीय है। आपके जीवन में भी यदि कोई स्त्री है जो आपको अपने मोह में बंधने ना दे तो उसका सम्मान कीजिए वो पूजनीय है। अपने लक्ष की तरफ बढ़िया । उसे फैसले के सामना करते हुए वहा से दूर होना ही आपका प्रेम है ना की मोह में पढ़ कर गलत रास्ते में चले जाने। रिश्ते का सम्मान कीजिए किसीको पा लेना ही प्रेम नही होता बहुत कुछ खोने का नाम प्रेम है। मां जब बच्चे को जन्म देता है अपने शरीर की बनावट अपनी खूबसूरती सबका त्याग करती है प्रेम हमे त्याग सीखाता है। राधा कृष्ण की पूजा इसलिए होती है वहा त्याग था ।।राधे राधे।। ।। जय श्री कृष्ण।।
Comments (4)

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
🌸 शुभ रात्रि - जय श्री राधा कृष्ण 🌸 रात के इस शांत प्रहर में, जब पूरी दुनिया सो रही है, आइए हम अपना मन उस परम आनंद और प्रेम के सागर में लगाएं, जो केवल हमारी लाडली जी और सांवरिया सरकार के चरणों में मिलता है। राधा राधा कृष्ण कहि, जो जन सुमिरैं नीत। तिनके कारज सिद्ध सब, मिलिहैं सांचो प्रीत॥ जो मनुष्य प्रतिदिन 'राधा-राधा' और 'कृष्ण-कृष्ण' का सुमिरन करते हैं, उनके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं और उन्हें जीवन में सच्चे प्रेम और आनंद की प्राप्ति होती है। जब तक आँखों में कान्हा की छवि और हृदय में श्री जी का नाम न हो, तब तक यह रात अधूरी है। आइए सब कुछ उन युगल सरकार के चरणों में समर्पित करके विश्राम करें। आप को एक शांत और भक्तिमयी शुभ रात्रि! 🙏

Rohit Patel
Jul 3, 2026
जी रमा जी...मोह मे बंधन है और प्रेम मे त्याग है... राधे राधे जी 🌹🌹🙂🙏💕💞💕 शुभ रात्रि वंदन जी 🌹🌹🤝🤗💞💕💞💕

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏 जोगनि जोग न जानई, परै प्रेम रस माहिं। डोलत मुख ऊपर लिए, प्रेम जटा की छांहि।। अर्थ: जो जीवात्मा रूपी गोपी या भक्त प्रेम में लीन है, वह योग साधना के कठिन नियमों (आसन, प्राणायाम, वैराग्य) को नहीं जानती। वह पूरी तरह से ईश्वर या प्रियतम के प्रेम रूपी रस में डूब चुकी है। वह हर समय अपने चेहरे पर एक अजीब सी मस्ती, आनंद और प्रियतम की याद लिए घूमती रहती है। जैसे योगी अपनी जटाओं की छाया में बैठते हैं, वैसे ही इस प्रेमी भक्त ने सांसारिक बंधनों को छोड़कर ईश्वर के "प्रेम रूपी जटाओं" की शीतल छाया का आश्रय ले लिया है। मुख्य संदेश: ईश्वर को पाने के लिए कठिन योग साधना, तपस्या या ढोंग की आवश्यकता नहीं है। सच्चा और निश्छल प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे आसान और सबसे आनंदमयी मार्ग है। जब व्यक्ति प्रेम रस में डूब जाता है, तो उसे किसी अन्य साधना की सुध नहीं रहती। 🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Jul 3, 2026
है श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी है नाथ नारायण वासुदेवाय जय श्री राधे कृष्णा जी का असीम स्नेह अपार आशीर्वाद कृपा सदेव आप और परिवार पर बना रहे उज्जवल भविष्य KI शुभ कामनाएं करते हैं जी 👌👍👌👍👌👍👌🙏🙏🙏🙏
