
Tarlok singh
133 days ago
*रामचंद्र कह गए सिया* से, ऐसा *कलयुग आएगा...* *हंस चुगेगा दाना-दुनका,* *कौआ मोती खाएगा..!* *सच्चाई* भूखी *सोएगी,* *झूठा महल बनाएगा...* *नेकी सिसकेगी* कोने में, *पाप सरेआम मुस्काएगा...* *ज्ञानी* बैठा *मौन रहेगा,* *मूर्ख शोर मचाएगा...* *धर्म* खड़ा *बाजार* में *बिकने,* *अधर्म सिंहासन पाएगा..!* *अपने* होंगे *बेगाने,* *पराया अपना बन जाएगा...* *स्वार्थ की* इस *आंधी में,* *प्रेम कहीं छिप जाएगा...!*
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