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Rama Devi Sahu

295 days ago

🚩आराध्य भी आराधना करते हैं...!!! . एक बार नारद जी श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। . वह बड़ी आतुरता से उनके कक्ष में प्रवेश करने लगे कि तभी द्वारपालों ने रास्ता रोक दिया। . नारद जी ने कारण पूछा तो उत्तर मिला, 'प्रभु अभी आराधना में व्यस्त हैं ।' . नारद ने कहा, 'रास्ता छोड़ो, मैं तुम्हारे इस बहकावे में नहीं आने वाला।' पर यह सुनकर भी संतरी डटे रहे। मन मसोस कर उन्हें प्रतीक्षा करनी पड़ी। . कुछ देर बाद स्वयं श्रीकृष्ण ने कपाट खोले। नारद जी ने प्रणाम करके तुरंत शिकायत की, . 'देखिए न, आपके द्वारपालों ने एक बेतुका बहाना बनाकर मुझे भीतर जाने से रोक दिया। ये कह रहे थे कि आप पूजा कर रहे हैं ।' . श्रीकृष्ण बोले, 'यह सत्यवचन है नारद। हम आराधना में ही मग्न थे।' . नारद ने कहा,'भगवन् आप और आराधना ?' . श्रीकृष्ण बोले, 'देखना चाहोगे, हम किसकी आराधना में लीन थे ? आओ भीतर आओ।' . भीतर एक पुष्पमंडित पालने पर अनेक छोटी- छोटी प्रतिमाएं झूल रही थीं। . नारद जी ने एकाग्र दृष्टि से देखा। कुछ प्रतिमाएं गोकुल की गोप- मंडली की थीं, तो कुछ स्वयं उनकी। . तब नारद जी ने बौराई आंखों से प्रभु को निहारा। फिर पूछा, 'भला आराध्य आराधकों की आराधना कब से करने लगा ? . भक्त गुहार करे और भगवान कृपा, यह सीधी रीत तो समझ में आती है। पर यह दूसरी अटपटी परंपरा आपने क्यों चलाई ?' . श्रीकृष्ण ने कहा, 'मुझे बताओ नारद, भक्त मेरी आराधना क्यों करते हैं ? किस प्रयोजन से मेरी उपासना करते हैं ?' . नारद बोले, 'प्रभु वे आपसे आपका प्रेम चाहते है।' . श्रीकृष्ण ने कहा 'नारद, ठीक इसी प्रयोजन से मैं भी अपने भक्तों की आराधना करता हूं। मैं भी भक्त से प्रेम की आकांक्षा रखता हूं। . भक्त से उसका प्रेम मांगता हूं। प्रेम का यही महादान पाने के लिए मैं निराकार से साकार होकर आता हूं। . पर मानव इसी बात को नहीं समझ पाता। वह तो हमसे केवल धन-दौलत ही मांगता है जबकि मैं भक्त का प्रेम पाने के लिए उसकी ओर देखता रहता हूं। 🙏🌷जय जय श्री राधे🌷🙏

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 9, 2025

Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe 🙏 Suprabhat Jii 🌹🌹

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Nov 8, 2025

jai shree shyam 🙏