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Rama Devi Sahu

13 hours ago

हमारे वृंदावन पागलों की भूमि है इस भूमि को वही समझ सकता है जो पागल है राधा नाम का जो पागल है बांके बिहारी के नाम का संत जन कहते हैं वृंदावन पागलों की भूमि है प्रेम की भूमि है दुनिया में इसका इलाज कहीं नहीं होता संभलकर अन्ना मेरी छलिया की नगरी में कहीं वह रूप का सागर आपको मिल गया आप सब कुछ भूल जाओगे भूल जाओगे दुनियादारी भूल जाओगे अपने आप को केवल आपके शब्दों से निकलेगा राधे राधे राधे राधे राधे वृंदावन मेरी स्वामिनी श्री राधे की हृदयस्थली है वृंदावन कोई शहर नहीं वृंदावन अपने आप में धाम है रसिक जन बहुत अच्छा गाते हैं कीरत सुधा के पग पग प्रयाग जहां केशव की केल कुंज कोटि-कोटि काशी है र रेणुका में रामेश्वर जमुना में जगन्नाथ है स्वर्ग लेकर हम करेंगे क्या जानते नहीं हम वृंदावन निवासी हैं राधे-राधे आप सबको

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