
Rama Devi Sahu
17 hours ago
🌷 ठाकुर जी की कृपा के द्वार हमेशा खुले रहते हैं..✍️ 🌷 कहते हैं संसार के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब ठाकुर जी अपनी कृपा का ऐसा द्वार खोलते हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। 🌷 एक बार एक भक्त, जिसका कर्ज़ा स्वयं भगवान श्री ठाकुर जी ने चुकाया था। 🌷 वृन्दावन में एक मोहन नाम का एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसके पास धन नहीं था। लेकिन ठाकुर जी के प्रति उसका प्रेम अनमोल था। 🌷 वह प्रतिदिन मंदिर जाकर ठाकुर जी की सेवा करता था। वह वहां बैठकर भजन गाता और जो कुछ भी कमाता था, उस में से थोड़ा सा भाग ठाकुर जी को अर्पित अवश्य करता था। 🌷 ऐसे ही समय बीतता गया, एक वर्ष ऐसा आया जब उसके परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी बीमार पड़ गई। बच्चों के लिए भोजन का प्रबंध करना बहुत मुश्किल हो गया। 🌷 मजबूरी में मोहन ने गांव के साहूकार से कर्ज लेना पड़ा। कुछ महीनों बाद कर्ज इतना बढ़ गया कि साहुकार ने धमकी दी कि सात दिन में पूरा पैसा नहीं चुकाया तो तुम्हारा घर और जमीन दोनों मेरे हो जाएंगे। 🌷 मोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने बहुत प्रयास किया, लेकिन धन का प्रबंध नहीं हुआ। आखिरकार वह ठाकुर जी के मंदिर पहुंचा । उनके चरणों में गिरकर बोला :-- ठाकुर जी मैंने जीवन भर आपका ही नाम लिया है। अब मेरी लाज आपक हाथों में है। 🌷 अगर आप भी मेरा साथ छोड़ देंगे, तो मेरा परिवार सड़क पर आ जाएगा। यह कहकर मोहन ठाकुर जी के सामने फूट-फूटकर रोने लगा। 🌷 आखिरकार वो दिन आ गया, साहुकार अपने आदमियों को लेकर मोहन के घर पहुंच गया। वह घर खाली कराने वाला ही था ...तभी एक तेजस्वी युवक वहां आया। उसके चेहरे पर बहुत अदभुत तेज था। और उसके हाथ में एक थैली थी। 🌷 युवक ने साहूकार से कहा :-- मोहन का कितना कर्ज है यह लो और अपना सारा हिसाब खत्म करो। साहूकार ने थैली खोली, उसमें उतने नहीं बल्कि उससे अधिक ही थे। उसने तुरंत रसीद लिखकर उस युवक को दे दी। वह युवक मुस्कुराया और वहां से चला गया। 🌷 कुछ देर बाद मोहन घर पहुंचा, और सारी बातें सुनी तो वह आश्चर्य में पड़ गया। वह युवक कौन था, उसने पूछा। लेकिन किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। 🌷 मोहन दौड़ता हुआ मंदिर पहुंचा , वहां जाकर उसकी नजर ठाकुर जी की मूर्ति पर पड़ी। उसने देखा ठाकुर जी के चरणों के पास वही रसीद रखी हुई थी। जो साहुकार ने क़र्ज़ चुकाने के बाद दी थी। मोहन का हृदय धड़क उठा। 🌷 मंदिर के पुजारी ने कहा :-- आज सुबह जब मंदिर खोला गया, तब से यह रसीद यही रखी हुई थी। किसी को नहीं पता ये कहां से आई। 🌷 यह सब सुनकर मोहन की आंखों से आंसू बह निकले, वह समझ गया उसका कर्ज ठाकुर जी ने ही चुकाया है। मोहन रोने लगा और बोला ठाकुर जी आपने मेरा घर और जमीन सब बचा लिया। 🌷 उसके बाद उसका विश्वास ठाकुर जी के प्रति और भी दृढ़ हो गया। वह हर किसी को यही कहता कर्ज केवल पैसों का नहीं होता, कभी कभी दुःख और चिंताओं का और जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है तब ठाकुर जी किसी ना किसी रूप में आकर उसका हर कर्ज चुका देते हैं। 🌷 तभी तो कहा गया है यदि भक्त की पुकार ह्रदय से निकले तो ठाकुर जी को स्वयं दौड़कर आना ही पड़ता है। 🌷 जय श्री राधे कृष्ण 🌷 🙏 🚩
Comments (5)

sanjeev kohli 🔱🙏🌹🚩
Sep 27, 2026
राधे राधे 🙏 ॐ शिव ॐ 🙏🌹🚩

Rama Devi Sahu
Sep 27, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Shubha Ratri Ji 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Sep 27, 2026
🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 Subha Ratri Ji 🙏🌹

सविता
Sep 27, 2026
Radhe radhe 🙏🌹 jai shree krishna ji 🌹🙏 shubh ratri vandan ji

R k jangid phulera Jaipur
Sep 27, 2026
जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ रात्रि 🌹🙏
