
Rama Devi Sahu
227 days ago
कृष्णम वंदे जगतगुरु 👇 कर्म चार तरह के हैं- नित्यकर्म, नैमित्तिक कर्म, आवश्यक कर्तव्यकर्म और प्रायश्चित्तकर्म। प्रतिदिन नियत समय पर जप, पाठ, स्तुति आदि करना एवं यथाधिकार सन्ध्या-गायत्री करना 'नित्यकर्म' है। अमावास्या, पूर्णिमा, सूर्य और चन्द्रग्रहण, रामनवमी आदि विशेष पर्वों में, तीर्थों में और संत-महात्माओं के मिलने पर जो शुभकर्म किये जाते हैं, वे सब 'नैमित्तिककर्म' हैं। जीवन-निर्वाह के लिये आजीविका आदि 'आवश्यक कर्तव्यकर्म' हैं। ज्ञात और अज्ञात पापों के नाश के लिये किये जानेवाले शुभ- कर्म 'प्रायश्चित्तकर्म' हैं। इसमें, ज्ञात पापों के नाश के लिये शास्त्रोक्त चान्द्रायण-व्रत आदि करना 'विशेष प्रायश्चित्त' और ज्ञात-अज्ञात दोनों पापों के नाश के लिये जप, व्रत, गंगास्नान आदि करना 'सामान्य प्रायश्चित्त' कहा जाता है। इन सब कर्मों को निष्कामभाव से ही करना चाहिये! इस प्रकार पुराणादि में मनुष्य के धर्म की बहुत उपयोगी शिक्षा मिलती है। अपने वर्णाश्रम के अनुसार उसका यथार्थ पालन करने से मनुष्यजन्म का प्रयोजन सिद्ध हो जाता है अर्थात जीव का कल्याण हो जाता है।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jan 16, 2026
🌹🌹 Shubha Shukravar ki Subha Kamanayen ke Sath Subha Dopahar Jii ll Radhey Radhey Jai Shree Krishna ll 🌹🌹

Radhe Radhe
Jan 16, 2026
‼️ गुड आफ्टरनून शुभ दोपहर की शुभकामनाएं राधे कृष्णा राधे राधे जी जय श्री कृष्णा जी।।‼️
