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Rama Devi Sahu

74 days ago

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 17 जून 2026* *⛅दिन - बुधवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - तृतीया रात्रि 09:38 तक तत्पश्चात् चतुर्थी* *⛅नक्षत्र - पुनर्वसु दोपहर 01:37 तक तत्पश्चात् पुष्य* *⛅योग - ध्रुव रात्रि 08:51 तक तत्पश्चात् व्याघात* *⛅राहुकाल - दोपहर 12:28 से दोपहर 02:10 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:41* *⛅सूर्यास्त - 07:15 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:18 से प्रातः 04:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:07 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️ व्रत पर्व विवरण - महाराणा प्रताप व छत्रसाल जयंती* *🌥️ विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* 🌷 *पुष्य नक्षत्र योग* 🌷 ➡ *18 जून 2026 गुरुवार को सूर्योदय से दोपहर 11:32 तक गुरुपुष्यामृत योग है ।* 🙏🏻 *१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | ब्रहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –* *ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |...... ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |*🙏🏻 🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷 🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |*🙏🏻 🌷 *गुरुपुष्यामृत योग* 🌷 🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |* 🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)* *🙏 🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*

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