
Rama Devi Sahu
154 days ago
. दिनांक 29.03.2026 रविवार को आने वाली है चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की :-👇 “कामदा एकादशी” चैत्र शुक्ल पक्ष में ‘कामदा’ नाम की एकादशी होती है। कहा गया है कि ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है। इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। व्रत विधि 01. एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। 02. व्रत के दिन सूर्योदय काल में उठें, स्नान कर व्रत का संकल्प लें। 03. संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। 04. उनकी प्रतिमा के सामने बैठ्कर श्रीमद भागवत कथा का पाठ करें। 05. एकादशी व्रत की अवधि 24 घंटों की होती है। 06. एकाद्शी व्रत में दिन के समय में श्री विष्णु जी का स्मरण करना चाहिए। 07. दिन व्रत करने के बाद जागरण करने से कई गुणा फल प्राप्त होता है। 08. इसलिए रात्रि में श्री विष्णु का पाठ करते हुए जागरण करना चाहिए। 09. द्वादशी तिथि के दिन प्रात:काल में स्नान कर, भगवान श्री विष्णु कि पूजा करें। 10. किसी जरूरतमंद या ब्राह्मणों को भोजन व दक्षिणा देकर व्रत का समापन करें। 11. यह सब कार्य करने के बाद ही स्वयं भोजन करना चाहिए। कथा पुराणों में इसके विषय में एक कथा मिलती है। प्राचीनकाल में भोगीपुर नामक एक नगर था। वहाँ पर अनेक ऐश्वर्यों से युक्त पुण्डरीक नाम का एक राजा राज्य करता था। भोगीपुर नगर में अनेक अप्सरा, किन्नर तथा गन्धर्व वास करते थे। उनमें से एक जगह ललिता और ललित नाम के दो स्त्री-पुरुष अत्यंत वैभवशाली घर में निवास करते थे। उन दोनों में अत्यंत स्नेह था, यहाँ तक कि अलग-अलग हो जाने पर दोनों व्याकुल हो जाते थे। एक दिन गन्धर्व ललित दरबार में गान कर रहा था कि अचानक उसे अपनी पत्नी की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय एवं ताल बिगडने लगे। इस त्रुटि को कर्कट नामक नाग ने जान लिया और यह बात राजा को बता दी। राजा को ललित पर बड़ा क्रोध आया। राजा ने ललित को राक्षस होने का श्राप दे दिया। जब उसकी प्रियतमा ललिता को यह वृत्तान्त मालूम हुआ तो उसे अत्यंत खेद हुआ। ललित वर्षों वर्षों तक राक्षस योनि में घूमता रहा। उसकी पत्नी भी उसी का अनुकरण करती रही। अपने पति को इस हालत में देखकर वह बडी दुःखी होती थी। वह श्रृंगी ऋषि के आश्रम में जाकर विनीत भाव से प्रार्थना करने लगी। उसे देखकर श्रृंगी ऋषि बोले–‘हे सुभगे ! तुम कौन हो और यहाँ किस लिए आई हो ?’ ललिता बोली–‘हे मुने ! मेरा नाम ललिता है। मेरा पति राजा पुण्डरीक के श्राप से विशालकाय राक्षस हो गया है। इसका मुझको महान दुःख है। उसके उद्धार का कोई उपाय बतलाइए।’ श्रृंगी ऋषि बोले–‘हे गंधर्व कन्या ! अब चैत्र शुक्ल एकादशी आने वाली है, जिसका नाम कामदा एकादशी है। इसका व्रत करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध होते हैं। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। यदि तू कामदा एकादशी का व्रत कर उसके पुण्य का फल अपने पति को दे तो वह शीघ्र ही राक्षस योनि से मुक्त हो जाएगा और राजा का श्राप भी अवश्यमेव शांत हो जाएगा।’ ललिता ने मुनि की आज्ञा का पालन किया और एकादशी का फल देते ही उसका पति राक्षस योनि से मुक्त होकर अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त हुआ। फिर अनेक सुंदर वस्त्राभूषणों से युक्त होकर ललिता के साथ विहार करते हुए वे दोनों विमान में बैठकर स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से समस्त पाप नाश हो जाते हैं तथा राक्षस आदि की योनि भी छूट जाती है। संसार में इसके बराबर कोई और दूसरा व्रत नहीं है। इसकी कथा पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। “जय जय श्रीहरि”

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Mar 28, 2026
🙏‼️ Om Namo Bhagavate Vasudevaya Namah ‼️🙏

ATIT KUMAR
Mar 28, 2026
जय हो विष्णु भगवान जी की
