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Rama Devi Sahu

191 days ago

*ईमानदारी की कीमत* दिन भर की कड़ी धूप में रिक्शा चलाने के बाद गरीब रामू के हाथ सिर्फ पचास रुपये लगे थे। घर में उसकी छोटी बेटी तेज बुखार से तप रही थी और दवा के लिए पैसे नहीं थे। तभी उसकी नज़र रिक्शे की पिछली सीट पर छूटे एक भारी सूटकेस पर पड़ी। उसे खोलते ही रामू की आँखें फटी रह गईं-उसमें लाखों रूपये और गहने थे। एक पल के लिए उसकी आँखों के सामने बेटी का बीमार चेहरा तैर गया। इन पैसों से उसकी हर तकलीफ दूर हो सकती थी। लेकिन अगले ही पल उसके जमीर ने आवाज़ दी। उसने सूटकेस बंद किया और सीधे पुलिस स्टेशन की तरफ रिक्शा दौड़ा दिया। जब सूटकेस केस के असली मालिक ने रोते हुए रामू को हजारों रुपये का इनाम देना चाहा, तो रामू ने रामू ने सिर्फ अपनी बेटी की दवा के लिए कुछ सौ रूपये ही लिए। यम के इस कदम ने साबित कर दिया कि गरीबी इंसान के कपड़े फाड़ सकती है, लेकिन उसका ईमान नहीं।

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