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Rama Devi Sahu

12 days ago

🔰 जीव के प्रति दया और निस्वार्थ सेवा ......✍️ 🔰 एक बार दो कृष्ण भक्त दर्शन के लिए जा रहे थे। पहले भक्त के पास सजावटी टोकरी और उसमें कीमती ताजे फूल थे। दूसरे भक्त के पास एक तुलसी दल था और कुछ फल थे। 🔰 पहले भक्त को अपनी महंगी टोकरी पर गर्व था। वह बोला :-- भगवान तो मेरे इन फूलों को देखकर खुश हो जाएंगे। वहीं दूसरा भक्त मन ही मन साधारण सी भेंट के लिए भगवान से क्षमा मांग रहा था। 🔰 तभी वहां रास्ते में उन्हें एक बीमार और प्यासा बन्दर मिला। दूसरे भक्त को उस बीमार बन्दर पर तरस आ गया और उसने वो फल उस बीमार बंदर को दे दिए और आगे माधव के दर्शन के लिए चल पड़ा। 🔰 यह देखकर पहला भक्त बोला :-- तुमने अपने फल इस बंदर को दे दिए, अब तुम भगवान को क्या भेंट करोगे। 🔰 दोनों मंदिर पहुंचे तो एक अदभुत चमत्कार हुआ। पहले भक्त ने जैसे ही अपने कीमती फूल माला भगवान को अर्पित किए, वो सब मुरझा कर नीचे गिर गए। लेकिन ठाकुर जी के ह्रदय पर एक ताजा तुलसी दल चमक रहा था। 🔰 राधा जी मुस्कुरा कर बोली :-- भगवान को तुम्हारी कीमती वस्तुएं नहीं बल्कि जीव दया का नि: स्वार्थ भाव प्रिय है। जो तुमने उस बेजुबान को दिया। वह सीधे ठाकुर जी को स्वीकार ह...🙏

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