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Rama Devi Sahu

154 days ago

एक बार एक बूढ़े ब्राह्मण श्री बिहारी जी के दर्शन के लिए बहुत दूर से पैदल चलते हुए वृंदावन आये तो उन्होंने मंदिर के गोस्वामी जी से बिहारी जी की सेवा मांगी l स्वामी जी ने रात की चौकीदारी की सेवा लगा दी और कहा - ध्यान रखना, कोई चोर चकुटा मंदिर में प्रवेश न कर पाए। बाबा ने बड़े भाव से सेवा स्वीकार की। कई वर्ष बीत गये। एक बार क्या देखते हैं कि बिहारी जी आधी रात को चल दिये सेवाकुंज की ओर तो बाबा भी चल दिए उनके पीछे पीछे! नजदीक पहुंचने पर बिहारी जी थक गए, मुड़कर देखा तो बाबा भी उनके पीछे थे। बाबा से कहा कि- मुझे सेवाकुंज तक तो पहुंचा दो। बाबा श्री बांके बिहारी जी को अपने कंधों पर बैठाकर ले गए। मन में आया- प्रभु इतनी रात में सेवाकुंज में क्या करने आयें हैं? आले से झांक कर देखा सेवाकुंज में तो, उन्होंने श्री बिहारी जी को श्री राधा जी संग रास करते हुए देखा। आहा .... क्या अनुपम रास। आहा ..... कितनी सुंदर मनोहारी जोड़ी। उनकी हालत तो पागलों जैसी हो गई, फ़िर गिर कर बेहोश हो गए। सुबह होने के ठीक थोड़ी देर पहले बिहारी जी ने बाबा को पुकारा - बाबा! मुझे मंदिर तक नहीं ले जाओगे। बाबा ने बिहारी जी को सुबह मंदिर में पहुंचाया और गोस्वामी जी से सारा वृत्तांत विस्तार से बताया । जब गोस्वामी जी मंगला आरती के लिए बिहारी जी को उठाने लगे तो बाबा ने उनके पांव पकड़ लिये और रोकर कहने लगे - मेरे गोविन्द अभी - अभी ही तो सोयें हैं! सारी रात सेवाकुंज मै रास रचाते हुए पूरे थक गए हैं - इन्हे अभी सोने दीजिए। जब ये सोकर उठे, तब आरती कर लीजिएगा। गोस्वामी जी की आंखों से आंसू बरस पड़े - बाबा की भक्ति और भाव को देखकर। तुरंत फिर बांके बिहारी मंदिर में हमेशा के लिए यह नियम बना दिया गया कि - साल में जन्माष्टमी को छोड़कर कभी भी श्री बांके बिहारी जी की मंगला आरती नहीं होगी। तब से लेकर आजतक केवल श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मात्र एक दिन ही होती है - श्री बांके बिहारी जी की मंगला आरती। जय श्री राधे

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