MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

144 days ago

श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य वैष्णव ग्रंथों के अनुसार, पूतना का वध केवल एक राक्षस का अंत नहीं था, बल्कि एक अधूरी भक्ति और करुणा की कहानी का समापन था। पूतना के पूर्वजन्म की कथा अत्यंत भावुक और गहरी है। यहाँ मै एक सुंदर और अध्यात्म की गहराई से एक बेहतरीन कथा प्रस्तुत कर रही हु। आप सभी अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें। पूतना: एक राक्षसी के उद्धार की अलौकिक कथा भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल में कई असुरों का अंत किया, लेकिन पूतना का वध सबसे विशिष्ट माना जाता है। आखिर क्यों एक प्राणघातक राक्षसी को भगवान ने 'माता' की गति प्रदान की? इसका उत्तर उसके पिछले जन्म की एक मर्मस्पर्शी घटना में छिपा है.. आइए अब कथा के रहस्य की गहराई में आध्यात्मिक गोते लगाते हुए प्रभु श्री कृष्ण की सुंदर लीला का आनंद लेते हैं। पिछले जन्म में कौन थी पूतना? पूतना अपने पूर्वजन्म में महाराज बलि की पुत्री थी, जिसका नाम रत्नमाला था। वह अत्यंत सुंदर और संस्कारवान थी। राजकुमारी रत्नमाला और वामन अवतार का संबंध कथा तब की है जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि के यज्ञ में प्रवेश किया। जब रत्नमाला ने भगवान वामन के उस अत्यंत मनमोहक और तेजस्वी रूप को देखा, तो उसके भीतर ममता उमड़ पड़ी। उसकी इच्छा: वामन देव को देखकर उसने मन ही मन कामना की, "काश! मेरा भी ऐसा ही सुंदर पुत्र होता, तो मैं उसे हृदय से लगाकर अपना दूध पिलाती।" भाव में परिवर्तन: लेकिन जैसे ही वामन देव ने उसके पिता बलि का सब कुछ तीन पग में नाप लिया और उन्हें बंदी बना लिया, रत्नमाला का प्रेम क्रोध में बदल गया। उसने सोचा, "यह बालक तो छलिया है, यदि यह मेरा पुत्र होता तो मैं इसे जहर पिलाकर मार देती।" भगवान का वरदान और न्याय अंतर्यामी भगवान ने रत्नमाला के इन दोनों ही संकल्पों को स्वीकार कर लिया। उन्होंने मन ही मन कहा— 'तथास्तु' (ऐसा ही हो)। पहली इच्छा (ममता): द्वापर युग में वह पूतना बनकर आई। चूँकि उसने पुत्र भाव से दूध पिलाने की इच्छा की थी, इसलिए भगवान ने उसे माता की गति दी। दूसरी इच्छा (विष): चूँकि उसने विष देने की बात सोची थी, इसलिए वह राक्षसी रूप में जहर लगाकर भगवान को मारने आई। पूतना का उद्धार जब पूतना ने कान्हा को दूध पिलाया, तो प्रभु ने उसके प्राणों के साथ-साथ उसके पूर्वजन्म के संचित पापों को भी खींच लिया। विष पिलाने के बावजूद, भगवान ने केवल उसकी 'ममता' को स्वीकार किया और उसे वही स्थान दिया जो माता यशोदा को प्राप्त है। क्या आपको पता था कि पूतना असल में एक भक्त हृदय राजकुमारी थी?

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!