
Rama Devi Sahu
83 days ago
कितना प्यारा चित्र है..! गीत गाते हुए खिवैया साँवरा अपनी प्रकाशीय साक्षी चेतना को मंजिल तक ले जा रहा है... #कश्ती… यह शरीर है.वह #नदिया… यह संसार है.वह #विष्णु बन जाने से थमा नहीं है,वह और आगे बह जाना चाहता है,हल्का होकर सारे आभूषण,रत्न,मुकुट परिधान उतारकर #शून्य से भी आगे विलीन हो जाना चाहता है. जब तुम #साक्षी बनकर बैठते हो…और परमात्मा को खिवैया बनने देते हो…तो तुम भी बहुत आगे निकल जाते हो. “इस कश्ती में बैठी है एक आत्मा… जो कभी डरती थी… कभी रुक जाती थी… पर आज… उसने खुद को #साक्षी बना लिया है… अब वह चुप है… शांत है… क्योंकि उसने खिवैया पहचान लिया है… जब जीवन की नाव परम शक्ति के हाथ में आ जाए… तो लहरें भी रास्ता बन जाती हैं… वह डर रही थी… लहरों को देखकर… तूफानों को देखकर… वह सोचती थी— “अगर मैं इस नदिया में उतरी, तो कहीं डूब न जाऊँ… और इसी डर में… वह किनारे पर ही बैठी रही… उसका मन भारी हो गया… विचार उलझ गए… और जीवन बोझ लगने लगा… एक दिन… उसे दूर से एक कश्ती दिखाई दी… उस कश्ती में एक दिव्य खिवैया था… जिसकी आँखों में शांति थी… और चेहरे पर मुस्कान… वह बोला— “क्यों रुकी हो? यह नदिया तुम्हें डराने नहीं… पार कराने आई है…आत्मा ने पूछा— “क्या मैं सुरक्षित रहूँगी?” खिवैया मुस्कुराया— अगर तुम खुद चलाओगी… तो डर रहेगा… अगर मुझे चलाने दोगी… तो केवल शांति होगी…” आत्मा कश्ती में बैठ गई… और धीरे-धीरे… उसने खुद को छोड़ दिया… अब वह कुछ #नहीं कर रही थी… बस साक्षी बनकर बैठी थी… नदिया बह रही थी… लहरें आ रही थीं… पर अब उसे डर नहीं था… क्योंकि— खिवैया जाग रहा था… और आत्मा #साक्षी बन गई थी… खिवैया तो अपनी धुन में बस गा रहा था.... "#जीवन कहीं भी ठहरता नहीं है - आँधी से तूफां से डरता नहीं है तू ना चलेगा तो चल देंगी राहें ओ ... तू ना चलेगा तो चल देंगी राहें मंज़िल को तरसेंगी तेरी निगाहें .…. तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा ओ नदिया चले चले रे धारा चन्दा चले चले रे तारा ...." 🌊 #जीवन कहीं भी ठहरता नहीं है... यह जीवन नहीं, बल्कि चेतना का प्रवाह है.आत्मा एक बिंदु है पर उसकी यात्रा बेहद है.वह कभी रुकती नहीं, केवल अवस्थाएँ बदलती है.जब हम कहते हैं “मैं थक गया”… तो असल में देह थकती है,आत्मा तो सदा अचल होते हुए भी गतिमान है.लेकिन हम देह वश होकर मंजिल से पहले ही अपना लक्ष्य समझ लेते हैं.मान सम्मान,रत्न जड़ित आभूषण, यात्रा की मेहनत के बाद का सुख..कौन छोड़ना चाहेगा.?लेकिन यह ठहराव आखिर सड़न तो पैदा करेगा ही न.जो इस लहरों को चीरकर तले तक गोता लगाएगा,वही चिर स्थायी शांति को पाता है,#सदाशिव...बनकर. 🌪️ #आँधी से तूफां से डरता नहीं है” यहाँ आँधी-तूफान क्या हैं? माया के संस्कार, मन के द्वंद्व,परिस्थितियों की परीक्षा. अंतर दृष्टि कहती है किजो साक्षी बन गया, उसे कोई तूफान हिला नहीं सकता.तूफान बाहर नहीं…मन के भीतर उठते हैं. । 🛤️ #तू ना चलेगा तो चल देंगी राहें” यह बहुत गहरा संकेत है.. अगर आत्मा स्वधर्म (आत्मिक जागृति) की ओर नहीं चलेगी,तो समय उसे धक्का देगा. परिस्थितियाँ, दुख, असंतोष ये सब “राहें” हैं जो हमें चलाने आती हैं.या तो समझकर चलो…या फिर ठोकर खाकर चलो. 👁️ #मंज़िल को तरसेंगी तेरी निगाहें” जब आत्मा अपनी मंज़िल (परम शांति, परम सत्य) को भूल जाती है,तो उसकी दृष्टि भटकती रहती है. हर चीज़ में सुख ढूंढती है. हर संबंध में पूर्णता चाहती है.पर…जो मंज़िल भीतर है, वह बाहर कैसे मिलेगी? 🔥 #तुझको चलना होगा” यह कोई साधारण पंक्ति नहीं,यह आत्मिक आदेश है. यह आंतरिक परमात्म की आवाज़ है, यह अंतरात्मा की पुकार है. “हे आत्मा, जाग… तू यहाँ रुकने के लिए नहीं आई है.जब आप समान बोला तो,#ईश्वर समान ही बनाऊँगी न तुम्हें!" 🌊🌙✨ #नदिया चले… चन्दा चले… तारा चले…” पूरा सृष्टि चक्र गतिमान है. नदियाँ बहती हैं , वैराग्य सिखाती हैं चाँद चलता है ,शीतलता सिखाता है, तारे चलते हैं ,स्थिर होकर भी प्रकाश देना सिखाते हैं.तो फिर… #आत्मा क्यों रुक जाए? सच्चाई यह है कि ड्रामा में सब कुछ फिक्स है.जिन्हें रुकने का पार्ट मिला हुआ है,वे रुकेंगी ही.लेकिन कौन नहीं रुकेगा..यह किसी को नहीं मालूम.कहानी भीड़ से उन गतिमान आत्माओं को निकालने की है..यह गीत उन्हीं को उद्वेलित करने के लिए है.

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jun 8, 2026
Ji Namaste 🙏 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Shyam Ji 🙏🌹

R k jangid phulera Jaipur
Jun 8, 2026
अति सुंदर जय श्री राधे कृष्णा शुभ प्रभात 🌹🙏
