
Rama Devi Sahu
348 days ago
🙏‼️ Jai Jagannath Swami Nayan Path Gami Bhavatu Me ‼️🙏 Dt.16.09.2025 (Tuesday) ************************** बहुत समय पहले की बात है, एक वृद्ध और सीधी-सादी महिला थीं, जिनका नाम कर्माबाई था। वे पुरी में रहती थीं और भगवान जगन्नाथ की बहुत बड़ी भक्त थीं। वे भगवान को अपने पुत्र के समान मानती थीं और उनके प्रति उनका प्रेम किसी भी विधि-विधान से ऊपर था। कर्माबाई का मानना था कि भगवान सुबह जल्दी भूखे होते होंगे, इसलिए वे रोज सुबह ब्रह्म मुहूर्त (भोर) में ही उठकर बिना स्नान किए, बिना पूजा-पाठ के, सीधे अपनी रसोई में जाती थीं और बड़े प्यार से खिचड़ी बनाती थीं। फिर उस खिचड़ी को वह एक थाली में रखकर, प्रेमपूर्वक भगवान जगन्नाथ को खिलाती थीं। वे मानती थीं कि भगवान उनके इस प्रेम भरे भोग को जरूर ग्रहण करेंगे। उनकी भक्ति इतनी सच्ची और निर्मल थी कि भगवान जगन्नाथ स्वयं बालक के रूप में रोज उनके घर खिचड़ी खाने आते थे। वे जल्दी-जल्दी खिचड़ी खाकर वापस मंदिर चले जाते थे, ताकि कोई उन्हें देख न ले। एक दिन एक पंडित कर्माबाई के घर आए। उन्होंने कर्माबाई को सुबह-सुबह बिना स्नान और पूजा के खिचड़ी बनाते देखा तो उन्हें समझाया कि भगवान को भोग लगाने के कुछ नियम होते हैं। उन्होंने कहा कि पहले सुबह स्नान करो, रसोई को साफ करो और फिर पूरे विधि-विधान से भगवान को भोग लगाओ। पंडित की बात सुनकर कर्माबाई ने सोचा कि वे शायद सही कह रहे हैं। अगले दिन उन्होंने पंडित के बताए अनुसार पहले स्नान किया, रसोई की सफाई की और फिर नियमपूर्वक खिचड़ी बनाई। लेकिन इस सब में काफी समय लग गया। उधर, भगवान जगन्नाथ रोज की तरह सुबह-सुबह कर्माबाई के घर खिचड़ी खाने के लिए पहुंच गए। उन्हें बहुत भूख लगी थी, लेकिन कर्माबाई ने अभी तक खिचड़ी नहीं बनाई थी। जब कर्माबाई ने खिचड़ी तैयार की और भगवान को भोग लगाने आईं, तो भगवान जगन्नाथ ने जल्दी-जल्दी खिचड़ी खाई और बिना मुंह साफ किए ही मंदिर के लिए निकल पड़े, क्योंकि मंदिर में पट खुलने का समय हो रहा था। जब मंदिर के पुजारी ने पट खोले तो देखा कि भगवान जगन्नाथ के मुख पर खिचड़ी के कुछ दाने लगे हुए थे और उनकी आंखों में आंसू थे। पुजारी हैरान हो गए और भगवान से इसका कारण पूछा। भगवान ने पुजारी को बताया कि आज उनकी परम भक्त कर्माबाई ने खिचड़ी बनाने में बहुत देर कर दी थी और वे भूखे थे। उन्होंने कहा कि नियम और विधि-विधान से ज्यादा महत्वपूर्ण भक्त का सच्चा प्रेम और भाव होता है। उन्होंने कहा कि कर्माबाई का प्रेम इतना गहरा था कि वे उनकी बनाई हुई खिचड़ी के बिना नहीं रह सकते थे। भगवान ने यह भी बताया कि आज उनकी प्यारी भक्त कर्माबाई इस दुनिया से चली गई हैं, और अब कौन उन्हें इतने प्रेम से खिचड़ी बनाकर खिलाएगा? यह कहानी हमें यह सिखाती है कि भगवान विधि-विधान से नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और भाव से प्रसन्न होते हैं। कर्माबाई की भक्ति के कारण ही आज भी पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान को सुबह खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। यह कथा हमें बताती है कि भक्ति में सबसे बड़ी चीज हृदय की सरलता और निस्वार्थ प्रेम है। 🙏🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🙏
Comments (4)

Rama Devi Sahu
Sep 16, 2025
Jai Jagannath Swami Nayan Path Gami Bhavatu Me 🙏 Mahaprabhu Shri Jagannath Ji ki Aasirbad se Aap ka Har Manokamna Purna Ho 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Sep 16, 2025
🙏🌹❤️🌹🙏🥀🥀

Radhe Radhe
Sep 16, 2025
🌹🌹 बहुत ही सुंदर अच्छी कहानी!!🌹 कर्मा बाई और श्री जगन्नाथ भगवान जी की गाथा।। उदाहरण निष्कर्ष अति उत्तम जी बहन जी धन्यवाद जी।। प्रभु जगन्नाथ भगवान की कृपादृष्टि ,आप और आपके पूरे परिवार पर सदैव बरसती रहे।। शुभ दोपहर की शुभकामनाएंजी।। ््््््ॐ 🔹🙏
