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Rama Devi Sahu

99 days ago

सच्चे भाव से भागवत कथा सुनने से पापी भी मुक्त हो सकता है,और अंततः भगवान की भक्ति ही मोक्ष का साधन है। गोकर्ण की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण से जुड़ी एक अत्यंत प्रेरणादायक कथा है, जो ज्ञान, भक्ति और श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव को दर्शाती है। यह कथा तुंगभद्रा नदी के तट पर रहने वाले आत्मदेव नामक ब्राह्मण, उनके ज्ञानी पुत्र गोकर्ण और पापी पुत्र धुंधकारी की है, जहाँ गोकर्ण ने अपने प्रेत बने भाई धुंधकारी को भागवत कथा सुनाकर मोक्ष दिलाया था। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार गोकर्ण की विस्तृत कथा गोकर्ण की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कंध 6) में अत्यंत प्रेरणादायक रूप में वर्णित है। यह कथा भक्ति, सत्संग और भागवत श्रवण की महिमा को दर्शाती है। प्राचीन समय में तुंगभद्रा नदी के तट पर एक नगर में आत्मदेव नामक ब्राह्मण रहता था। वह विद्वान और धार्मिक था, परंतु संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी रहता था। उसकी पत्नी का नाम धुंधुली था, जो स्वभाव से कर्कश और चंचल थी। आत्मदेव ने संतान प्राप्ति के लिए अनेक उपाय किए, पर सफलता न मिली। अंततः दुखी होकर वह वन में चला गया और एक संत से अपनी व्यथा कही। संत ने उसे समझाया कि यह सब पूर्वजन्म के कर्मों का फल है, परंतु आत्मदेव के बहुत आग्रह करने पर संत ने उसे एक दिव्य फल दिया और कहा— “यह फल अपनी पत्नी को खिला देना तो , तुम्हें पुत्र प्राप्त होगा।” धुंधुली को गर्भधारण करने से भय था। उसने सोचा कि गर्भावस्था के कष्ट क्यों सहे जाएँ। उसने वह फल स्वयं न खाकर घर की गाय को खिला दिया और अपनी बहन से गुप्त रूप से एक बालक लेकर आने को कहा।नौ महिने तक धुंधली गर्भवती होने का नाटक करती रही। कुछ समय बाद गाय ने एक दिव्य बालक को जन्म दिया, जिसके कान गाय जैसे थे — उसका नाम रखा गया गोकर्ण। बहन का लाया हुआ बालक धुंधकारी कहलाया। धुंधकारी बचपन से ही दुष्ट और कुसंगति में रहने वाला था। वह चोरी, जुआ और बुरे कर्मों में लिप्त रहने लगा। उसने अपने माता-पिता को बहुत कष्ट दिया। आत्मदेव ब्राह्मण अपने पुत्र के दुर्व्यवहार से अत्यंत दुखी हो गया। तब गोकर्ण ने अपने पिता को ज्ञान दिया— “यह संसार नश्वर है, मोह छोड़कर भगवान की भक्ति करो।” गोकर्ण के उपदेश से आत्मदेव ब्राह्मणने वैराग्य धारण किया और वन में जाकर भगवान का भजन करते हुए मोक्ष प्राप्त किया। धुंधकारी अत्यंत दुष्ट हो गया। वह वेश्याओं के साथ रहने लगा। एक दिन उन्हीं वेश्याओं ने धन के लोभ में उसे मार डाला। पापी कर्मों के कारण धुंधकारी प्रेत योनि में भटकने लगा। कुछ समय बाद गोकर्ण तीर्थयात्रा से लौटे। उन्होंने अपने घर में एक प्रेत की करुण आवाज़ सुनी। पूछने पर ज्ञात हुआ कि वह धुंधकारी की आत्मा है। गोकर्ण ने उसे मुक्ति दिलाने का उपाय खोजा। तब उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का सात दिन तक श्रवण (सप्ताह) आयोजित किया। धुंधकारी की प्रेतात्मा बाँस के सात गाँठों वाले एक स्तंभ में प्रवेश कर गई। प्रतिदिन कथा सुनते समय एक-एक करके बाँस की गाँठ टूटती गई। सातवें दिन सभी गाँठें टूट गईं और धुंधकारी को दिव्य शरीर प्राप्त हुआ। भगवान विष्णु के दूत उसे वैकुंठ ले गए।

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Comments (14)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 23, 2026

Ji Shukriya 🌹 Hna, Mai Ekdum thik hu...or Aap...?

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 23, 2026

*राधे राधे जी 🙏🙏* आप ki रात्रि सुखद एवं मंगलमय हो 🌹 आने वाली नई सुबह आप और आप सबके समस्त परिवार को ढेर सारी खुशियां दे 😊🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 23, 2026

*राधे राधे जी 🙏🙏* आप ki रात्रि सुखद एवं मंगलमय हो 🌹 आने वाली नई सुबह आप और आप सबके समस्त परिवार को ढेर सारी खुशियां दे 😊🌹

Rama Devi Sahu

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May 23, 2026

*राधे राधे जी 🙏🙏* आप ki रात्रि सुखद एवं मंगलमय हो 🌹 आने वाली नई सुबह आप और आप सबके समस्त परिवार को ढेर सारी खुशियां दे 😊🙏🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 23, 2026

*राधे राधे जी 🙏🙏* आप ki रात्रि सुखद एवं मंगलमय हो 🌹 आने वाली नई सुबह आप और आप सबके समस्त परिवार को ढेर सारी खुशियां दे 😊🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 23, 2026

*राधे राधे जी 🙏🙏* आप ki रात्रि सुखद एवं मंगलमय हो 🌹 आने वाली नई सुबह आप और आप सबके समस्त परिवार को ढेर सारी खुशियां दे 🌹🌸🌷

My Mandir  good by

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May 23, 2026

ji Bilkul Sahi kha Radhe Radhe 👏

My Mandir  good by

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May 23, 2026

good evening radhe radhe ji 🙏 kese ho aap

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

May 23, 2026

🌹🌹 Radhe Radhe 🌹 Jai Shree Krishna 🌹🌹 Shubh Sandhya Vandan Ji 🌹🥀🙏

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

May 23, 2026

जय श्री हरि विष्णु की 🌹🙏