
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
54 days ago
_ट्रैफिक जाम में फंस कर लोगों को गुस्सा आता है। इस बंदे ने 2.9 करोड़ का धंधा बना दिया। इसे कहते हैं 'आपदा में अवसर'।_ _मिलिए थाने के गौरव लोंधे से, जिन्होंने 'ट्रैफिक वड़ा पाव' से पूरे देश के बिजनेसमैन को हिला दिया है।_ _कैप्टिव ग्राहक रणनीति: गौरव ने नोटिस किया कि ट्रैफिक सिग्नल पर लोग 20-25 मिनट तक फंसे रहते हैं। एसी कारों में भूख लगती है, पर बाहर निकलने का विकल्प नहीं होता। इसे कहते हैं 'कैप्टिव ग्राहक। बस वहीं उन्हें गरमा-गरम Rs. 20 का वड़ा पाव बेचना शुरू कर दिया।_ _हर्ष गोयनका का सलाम: आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन, हर्ष गोयनका ($35,000 करोड़ वैल्यूएशन) ने गौरव की फोटो शेयर करके लिखा- "यह असली उद्यमिता है!"_ _शून्य-लागत व्यवसाय मॉडल: शून्य किराया: दुकान नहीं खोली, सिग्नल ही लोकेशन है। जीरो मार्केटिंग: ट्रैफिक ही उनका डिस्ट्रीब्यूशन और फुटफॉल है। शून्य भंडारण: ताजा बनाओ, ताजा बेचो।_ _2.9 करोड़ गणित एक सिग्नल पर दिन का गल्ला = 78,000। अगर गौरव थाने के सिर्फ 10 सिग्नल कवर कर लें, तो रोज़ का 780,000 और साल का 72 करोड़ 90 लाख। बिना किसी वीसी फंडिंग या एमबीए डिग्री के। क्या नए भारत के उद्यमियों को सलाम है।_
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