MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

27 days ago

😳 भारत के इतने विशाल पर्वतों में से... भगवान शिव और माता पार्वती ने रहने के लिए आखिर श्रीशैलम को ही क्यों चुना? क्या इस स्थान पर कोई ऐसी घटना घटी थी... जिसने देवों के देव को भी यहीं रुकने पर मजबूर कर दिया? 🏔️ सदियों से चली आ रही एक दिव्य कथा... 📜 श्रीशैलम में भगवान शिव और माता पार्वती ने यही स्थान क्यों चुना? आंध्र प्रदेश के नल्लमाला पर्वतों की घनी वादियों के बीच स्थित श्रीशैलम भारत के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक माना जाता है। यहाँ भगवान शिव "मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग" के रूप में और माता पार्वती "भ्रामराम्बा देवी" के रूप में विराजमान हैं। यह वही स्थान है जहाँ एक साथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और अष्टादश शक्तिपीठों में से एक स्थित है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि... पूरे ब्रह्मांड के स्वामी भगवान शिव ने रहने के लिए यही स्थान क्यों चुना? पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दोनों पुत्र—श्रीगणेश और भगवान कार्तिकेय—के बीच यह प्रश्न उठा कि दोनों में पहले विवाह किसका होगा। भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा— "जो सबसे पहले सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके लौट आएगा, उसी का विवाह पहले होगा।" यह सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर बैठकर पूरी पृथ्वी की यात्रा के लिए निकल पड़े। लेकिन भगवान गणेश शांत रहे। उन्होंने कुछ क्षण विचार किया। फिर अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की। इसके बाद हाथ जोड़कर कहा— "मेरे लिए माता-पिता ही सम्पूर्ण संसार हैं। आपकी परिक्रमा करना ही पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है।" भगवान शिव और माता पार्वती अपने पुत्र की इस बुद्धिमत्ता और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने श्रीगणेश को विजेता घोषित कर उनका विवाह पहले कर दिया। जब भगवान कार्तिकेय अपनी यात्रा पूरी करके लौटे और उन्हें यह बात पता चली, तो उन्हें लगा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। वे अत्यंत दुःखी होकर कैलाश छोड़कर दक्षिण दिशा में स्थित क्रौंच पर्वत पर चले गए। आज यही स्थान श्रीशैलम के नाम से प्रसिद्ध है। कार्तिकेय ने वहीं कठोर तपस्या आरम्भ कर दी और किसी से भी मिलने से इंकार कर दिया। जब भगवान शिव और माता पार्वती को अपने पुत्र के दुःख का पता चला, तो वे स्वयं उसे मनाने क्रौंच पर्वत पहुँचे। उन्होंने बहुत समझाया... लेकिन कार्तिकेय ने वहीं रहने का निर्णय लिया। अपने पुत्र से दूर न रहने की इच्छा से भगवान शिव और माता पार्वती ने भी निश्चय किया कि वे इसी पवित्र पर्वत पर सदैव विराजमान रहेंगे। धार्मिक मान्यता है कि तभी भगवान शिव यहाँ "मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग" के रूप में प्रकट हुए और माता पार्वती "भ्रामराम्बा देवी" के रूप में स्थापित हुईं। इसी कारण श्रीशैलम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रेम, परिवार के महत्व और भगवान की करुणा का जीवंत प्रतीक माना जाता है। आज भी लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी यात्रा करके यहाँ पहुँचते हैं। घने जंगल, ऊँचे पर्वत, कृष्णा नदी की गहरी घाटियाँ और मंदिर की दिव्य आरती पूरे वातावरण को अलौकिक बना देती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ दर्शन करने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी कारण श्रीशैलम को भारत के सबसे दिव्य शिव धामों में गिना जाता है। 🌺 अंतिम संदेश भगवान केवल वहीं नहीं रहते जहाँ सबसे सुंदर महल हों... वे वहाँ रहते हैं, जहाँ प्रेम, त्याग और परिवार के प्रति समर्पण अमर हो जाता है। यही कारण है कि भगवान शिव और माता पार्वती ने श्रीशैलम को अपना निवास बनाया। 🚩 हर हर महादेव। 🙏

Post media

Comments (4)

सविता

सविता

Aug 3, 2026

"एक पुष्प, एक बेलपत्र, एक लोटा जल की धार, कर दे सबका उद्धार। सावन सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं

NITIN SONI 🙏🌹

NITIN SONI 🙏🌹

Aug 3, 2026

जय श्री राधे कृष्णा

My Mandir  good by

My Mandir good by

Aug 3, 2026

good morning Radhe Radhe ji 👏 tabiyat kesi h apki aur apne shankh ko kaan par lagaya Radhe Radhe ji 👏

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Aug 2, 2026

good night ji 🙏