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*वृद्धाश्रम में बाप को छोड़कर बेटा जाने ही वाला था।* तभी उसकी नज़र पड़ी—उसका पिता वृद्धाश्रम के संचालक से हँसते हुए बात कर रहा था। बेटा ठिठक गया। उसने आश्चर्य से पूछा, *“आप मेरे पापा को कैसे जानते हैं?”* संचालक मुस्कुराया और बोला *“आज से तीस साल पहले, तुम्हारे पिता हमारे अनाथ आश्रम से एक बच्चा गोद लेकर गए थे।”* बेटे की आँखें भर आईं… उसे समझ आ गया कि *कभी-कभी अच्छे कर्म करने की भी कीमत चुकानी पड़ती है।* *➥ संदेश (Moral):-* जो हमें जीवन देता है, उसे जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेला छोड़ना सबसे बड़ा पाप है। *माता-पिता की सेवा कोई बोझ नहीं, बल्कि सौभाग्य है। 👏*

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Comments (8)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 29, 2026

धन्यवाद 🙏महादेव आपको आशीर्वाद दें

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 29, 2026

कर्पूर गौरव करुणा वाताराम संसार सारण भुजगेन्द्रम हारम सदा वसंतम हृदय रविन्द्रे भमण भमानी साहित्म नमामि: 🕉️ हर हर शंभु 🕉️

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 29, 2026

जय भोलेनाथ धन्यवाद 🙏

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Jun 29, 2026

जय भोलेनाथ 🚩🙏

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 29, 2026

ईश्वर आपको आशीर्वाद दें 🙏

सविता

सविता

Jun 29, 2026

"करता करे ना कर सके, शिव करे सो होय। तीनों लोक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा ना कोई।"

बरखा शर्मा

बरखा शर्मा

Jun 29, 2026

🌷🌷har har mahadev ji🌷 Shubh prabhat ji 🙏🌷🌷