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Rama Devi Sahu

81 days ago

**परमा एकादशी** (जो अधिक मास/मलमास के कृष्ण पक्ष में आती है) की व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। यह कथा जीवन से दरिद्रता दूर करने और परम सुख की प्राप्ति के लिए बहुत फलदायी मानी जाती है। ### **परमा एकादशी व्रत कथा** प्राचीन काल में काम्पिल्य नगरी में **सुमेध** नामक एक अत्यंत ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम **पवित्रा** था, जो परम सती, पतिव्रता और धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। वह ब्राह्मण परिवार अत्यंत निर्धन था। सुमेध और पवित्रा के पास कभी-कभी दो वक्त के भोजन के लिए भी अन्न नहीं होता था। इसके बावजूद, यदि उनके द्वार पर कोई भिक्षुक या अतिथि आ जाता, तो पवित्रा स्वयं भूखी रहकर अपना भोजन उस अतिथि को दे देती थी। **गरीबी से मुक्ति का उपाय:** एक दिन गरीबी से तंग आकर सुमेध ने अपनी पत्नी से कहा, "धन कमाने के लिए मुझे विदेश चले जाना चाहिए, क्योंकि यहाँ रहकर हमारी दरिद्रता दूर नहीं हो रही।" पवित्रा ने नम्रतापूर्वक कहा, "स्वामी! धन और सुख-दुख पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार ही मिलते हैं। हम जहाँ भी रहेंगे, भाग्य का लिखा ही पाएंगे। इसलिए आप यहीं रहकर संतोष करें।" सुमेध पत्नी की बात मानकर वहीं रुक गया। **महर्षि कौण्डिल्य का आगमन:** कुछ समय बाद, उनके घर पर **महर्षि कौण्डिल्य** पधारे। सुमेध और पवित्रा ने भूखे होने के बाद भी ऋषि का पूरे आदर-सत्कार के साथ पूजन किया। पवित्रा ने महर्षि से हाथ जोड़कर पूछा, "हे ऋषिवर! हमारी दरिद्रता और दुखों को दूर करने का कोई सरल उपाय या व्रत बताएं, जिससे हमारा कल्याण हो सके।" **परमा एकादशी का उपदेश:** महर्षि कौण्डिल्य ने प्रसन्न होकर कहा, "पुत्री! तुम दोनों पूर्वजन्म के किसी पाप के कारण यह दुख भोग रहे हो। इससे मुक्ति के लिए तुम **मलमास (अधिक मास) के कृष्ण पक्ष की 'परमा एकादशी'** का व्रत करो। यह एकादशी धन, धान्य और सुख देने वाली है। इसके प्रभाव से कुबेर जी को धनपति का पद मिला था।" महर्षि ने उन्हें व्रत की पूरी विधि बताई और कहा कि व्रत के अंतिम दिनों में 'पंचरात्रि' व्रत (पांच दिनों का विशेष नियम) भी करना चाहिए। **व्रत का फल:** ऋषि के कथनानुसार, सुमेध और पवित्रा ने पूरी श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ परमा एकादशी का व्रत व रात्रि जागरण किया। व्रत के समापन के अगले ही दिन, राजा के रूप में एक दिव्य पुरुष उनके द्वार पर आया। उसने ब्राह्मण दंपत्ति की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें रहने के लिए एक सुंदर महल, गायें और आजीविका के लिए बहुत सारा धन और भूमि दान में दी। इस व्रत के प्रभाव से सुमेध और पवित्रा की सारी दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो गई और वे सुखपूर्वक रहने लगे। अंत में उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति हुई। ### **कथा का महत्व** > जो भी व्यक्ति इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। यह व्रत मनुष्य के सभी पापों का नाश करके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। > **जय श्री हरि विष्णु!** 🙏

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Comments (6)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 10, 2026

🙏 Radhey Radhey Jii 🙏 Shubha Ratri Vandan Ji 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 10, 2026

🙏‼️ Hari Om Tat Sat ‼️🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 10, 2026

🙏‼️ Om Namo Bhagavate Vasudevaya Namah ‼️🙏 Subha Ratri Vishram Ji 🙏🌹

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jun 10, 2026

राधे राधे जी 🙏 शुभ रात्री वंदन

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Jun 10, 2026

Jai shree hari bishnu ji 🪷🐚🌿🌷 shubh sandhya vandan 🙏☘️🌷

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Jun 10, 2026

जय श्री हरि विष्णु के शुभ संध्या वंदन जी 🙏