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Rama Devi Sahu

2 hours ago

🚩 जब हनुमान जी ने समुद्र में डूबते हुए सूर्य की तरह चमकते पर्वत को देखा! माता सीता की खोज में हनुमान जी समुद्र पार कर रहे थे। रास्ता लंबा था, लेकिन उनके मन में थकान से ज्यादा श्रीराम का नाम था। तभी समुद्र से मैनाक पर्वत ऊपर उठा। मैनाक ने हनुमान जी से कहा कि वे कुछ समय उसके ऊपर विश्राम कर लें। आखिर इतनी लंबी यात्रा में शरीर को आराम की आवश्यकता थी। लेकिन हनुमान जी ने मुस्कुराकर पर्वत को स्पर्श किया और कहा— “तुम्हारा प्रेम और सम्मान मेरे लिए बहुत बड़ा है, लेकिन जब तक श्रीराम का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक विश्राम कैसे कर सकता हूँ?” 🙏🚩 सोचिए... सामने आराम था। पीछे कोई दबाव नहीं था। फिर भी हनुमान जी रुके नहीं। क्योंकि उनके लिए कर्तव्य आराम से बड़ा था। यही छोटी-सी घटना हनुमान जी की महान शक्ति को समझाती है। शक्ति केवल पर्वत उठाने में नहीं होती। शक्ति यह भी है कि सुविधा सामने हो और फिर भी इंसान अपने लक्ष्य से विचलित न हो। आज हमारे जीवन में भी कई बार मंजिल के रास्ते में ऐसी सुविधाएँ आती हैं जो हमें हमारे लक्ष्य से भटका देती हैं। ऐसे समय हनुमान जी को याद कीजिए। लक्ष्य स्पष्ट रखिए। कर्तव्य को प्राथमिकता दीजिए। और श्रीराम का नाम लेकर आगे बढ़ते रहिए। 🚩 क्योंकि जिसने अपने जीवन का उद्देश्य प्रभु की सेवा बना लिया, उसके लिए कठिन रास्ता भी साधना बन जाता है। ❤️ 🙏 हे पवनपुत्र हनुमान जी, हमें भी ऐसा संकल्प दीजिए कि सुविधा और कठिनाई दोनों में हमारा मन अपने सही लक्ष्य से न भटके। अगर आपके हृदय में भी बजरंगबली के लिए श्रद्धा है तो लिखिए— जय बजरंगबली 🚩 जय श्री राम 🚩

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