
Rama Devi Sahu
65 days ago
एक बार पुरी धाम में संध्या आरती का समय था। मंदिर दीपों की रोशनी से जगमगा रहा था। सैकड़ों भक्त हाथों में दीप लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के दर्शन कर रहे थे। भीड़ में एक गरीब युवक भी खड़ा था। उसके मन में बहुत दुख था। व्यापार में घाटा, घर की परेशानियाँ और भविष्य की चिंता उसे अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। वह चुपचाप भगवान जगन्नाथ को देखता रहा। जब आरती शुरू हुई, तो पूरे मंदिर में "जय जगन्नाथ" का जयघोष गूंज उठा। दीपों की चमक और भक्ति के उस वातावरण में युवक की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने हाथ जोड़कर कहा, "प्रभु, मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं है। बस आपका भरोसा है।" कहते हैं, सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। उस दिन के बाद युवक ने मेहनत और विश्वास नहीं छोड़ा। धीरे-धीरे उसके जीवन की कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। उसका व्यापार चल पड़ा, परिवार में खुशियाँ लौट आईं और मन को शांति मिल गई। कुछ वर्षों बाद वही युवक फिर मंदिर आया। इस बार उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन दुख के नहीं—कृतज्ञता के। उसने मुस्कुराकर कहा, "प्रभु, उस दिन मैं खाली हाथ आया था, लेकिन आपने मेरा पूरा जीवन भर दिया।" सीख: जब सब रास्ते बंद दिखाई दें, तब भी विश्वास का दीप जलाए रखें। भगवान जगन्नाथ की कृपा से अंधेरी रात भी उजाले में बदल सकती है। 🚩 जय जगन्नाथ महाप्रभु 🚩

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