
Rama Devi Sahu
20 days ago
*पुंडलिक की भक्ति: जब माता-पिता की सेवा बनी भगवान की आराधना* महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा में संत पुंडलिक का नाम माता-पिता की सेवा और अनन्य भक्ति के प्रतीक के रूप में लिया जाता है. कथा के अनुसार, पुंडलिक को अपने माता-पिता की सेवा का महत्व समझ आया और उन्होंने अपना जीवन उनकी सेवा में समर्पित कर दिया. उनकी सेवा इतनी निष्ठापूर्ण थी कि वही उनके लिए साधना बन गई. पुंडलिक की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उनसे मिलने आए. उस समय पुंडलिक अपने माता-पिता की सेवा में व्यस्त थे. उन्होंने भगवान से थोड़ी प्रतीक्षा करने का निवेदन किया और उनके खड़े होने के लिए एक ईंट आगे कर दी. भगवान उसी ईंट पर खड़े होकर पुंडलिक की प्रतीक्षा करने लगे. इसी स्वरूप को पंढरपुर के विठ्ठल के रूप में पूजा जाता है, दोनों हाथ कमर पर रखे, ईंट पर खड़े भगवान. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
