
Rama Devi Sahu
193 days ago
. महल में कमी एक राजा था। वह एक सन्त के पास जाया करता और उनका सत्संग किया करता था। उस राजा ने अपने लिये एक महल बनाया। पहले उसके कई महल थे, पर अब ऐसा महल बनाया, जिसमें आराम की सब चीजें हों और उसमें ज्यादा ठाट-बाट से रहें। राजा ने सन्त से कहा–‘महाराज ! एक दिन आप चलो, हमारी कुटिया पवित्र हो जाय !’ सन्त उसको टालते गये। राजा ने बहुत बार कहा तो एक दिन सन्त बोले–‘अच्छा भाई, चलो।’ राजा ने सन्त को महल दिखाना आरम्भ किया कि यह हमारे रहने की जगह है, यह हमारे पंचायती की जगह है, यह भोजन की जगह है, यह शौच-स्नान की जगह है, आदि-आदि। सन्त चुपचाप देखते रहे, कुछ बोले नहीं। अगर वाह-वाह करते हैं तो हिंसा लगती है। कारण कि मकान बनाने में बड़ी हिंसा होती है! बहुत-से जीव मरते हैं। चूहे, साँप, गिलहरी आदि के रहने और चलने-फिरने में आड़ लग जाती है; क्योंकि जितने हिस्से में मकान बना है, उतने हिस्से में वे जा नहीं सकते, स्वतन्त्रता से घूम नहीं सकते। पहले उतने हिस्से में सब जीवों का हक लगता था, पर अब केवल एक का ही हक लगता है। सन्त कुछ बोले नहीं तो राजा ने समझा कि महाराज को मकान पसन्द नहीं आया। राजा लोग चतुर होते हैं। राजा ने पूछ लिया कि महाराज ! महल में कमी क्या है ? सन्त बोले कि कमी तो इसमें बड़ी भारी है! राजा ने विचार किया कि बड़े-बड़े कुशल कारीगरों ने महल बनाया है। उन्होंने कोई कमी बाकी नहीं छोड़ी। जहाँ कमी दीखी, उसको पूरा कर दिया। परन्तु बाबाजी कहते हैं कि कमी है, और वह भी मामूली नहीं है, बड़ी भारी कमी है! ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। राजा को बड़ा आश्चर्य आया और पूछा कि क्या बहुत बड़ी कमी है ? सन्त बोले कि हाँ, बहुत बड़ी कमी है! राजा ने पूछा कि महाराज ! क्या कमी है ? सन्त बोले कि यह जो दरवाजा रख दिया है न, यह कमी है! राजा बोला कि महाराज ! दरवाजे के बिना महल क्या काम आये ? सन्त बोले कि तुमने यह महल क्यों बनवाया है ? राजा ने कहा कि महाराज ! मैंने अपने रहने के लिये बनाया है। सन्त बोले कि राजन् ! तुमने तो रहने के लिये बनाया है, पर एक दिन लोग उठाकर ले जायँगे ! इससे ज्यादा कमी और क्या होगी, बताओ ? बनाया तो है रहने के लिये, पर लोग उठाकर बाहर ले जायँगे, रहने देंगे नहीं! इसलिये अगर रहना ही हो तो यह दरवाजा नहीं होना चाहिये, बाहर निकलने की जगह नहीं होनी चाहिये। तात्पर्य है कि यह अपना असली घर नहीं है। एक दिन सब कुछ छोड़कर यहाँसे जाना पड़ेगा। हमारा असली घर तो वह है, जहाँ पहुँचने पर फिर लौटकर आना ही न पड़े–‘यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम’ (गीता १५।६)। – श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥ ********************************************
Comments (6)

Rama Devi Sahu
Feb 18, 2026
🙏🌺 Om Shree Ganeshay Namah 🙏 Gauri Putra Shree Ganesh Apni Kripa Drishti se Aap ka Ratri Sukhd or Mangalmay Ho 🌹❤️🌹

Rama Devi Sahu
Feb 18, 2026
🌹 *Ham Baki Sabhi Riste ke Sath Paida Hote hai... ...... Par..... *Dosti* hi ek matra Eeisa Rista hai jise ham khud Banate hai* 🌹🌹 Good 🌹 Nigh 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Feb 18, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🌹❤️🌹

Saumya Sharma
Feb 18, 2026
बहुत ही सुन्दर प्रसंग के साथ बेहतरीन पोस्ट के साथ आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरी प्यारी बहन 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Feb 18, 2026
ॐ गं गणपतए नमः 🙏🌹🙏 गणेश जी करते रहें सुख समृद्धि की बरसात 🙏 शिव शक्ति जी साथ दें, सर पर रख कर हाथ 🙏 सपने सब साकार हों, ऐसी हो करामात 🙏जीवन में होती रहे खुशियों की बरसात 🙏🌹☺️ शुभ मंगलकामनाओं के साथ शुभ रात्रि विश्राम मेरी प्यारी बहन 🙏🌹☺️ आने वाला दिन आपके लिए शुभ फलदाई व मंगलमय रहे 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Feb 18, 2026
जय श्री राधे कृष्ण बहना जी 🙏🌹☺️
