
Rama Devi Sahu
134 days ago
हे गोविन्द !! मैंने कभी 'तुम्हें' देखा नहीं पर मैं ये सोच कर हर्षित हो उठता हूँ कि तुम्हारी दृष्टि हर समय मुझ पर है। मैंने कभी 'तुम्हें' सुना भी नहीं पर मैं ये सोच कर रोमांचित हो उठता हूँ कि तुम मेरे वाणी और मौन दोनों स्वरों को सुनते हो। मैं तुम्हें जानता भी नहीं हूँ , पर मैं गर्वित हो उठता हूँ सोचकर कि 'तुम' तो मुझे जानते हो। न देखा, न सुना, न जाना, फिर भी मैं इस संसार में केवल और केवल तुम्हीं से प्रेम करता हूँ। तुम ही मेरा वास्तविक प्रेम हो। तुम मेरे प्रति इस प्रेम से भी बढ़कर कोई भाव रखते होगे। मुझे तुम सुख दो या दुख , फर्क नहीं पड़ता.... मैं यही सोच कर आनंदित हो जाता हूँ कि , 'तुम' मुझे दे रहे हो। मैं नहीं जानता मुझमें इतनी सामर्थ्य , योग्यता है या नहीं कि मैं तुम्हारा बन सकूँ, तुममें स्थित हो सकूँ...पर ये सोचकर मैं समाधिस्थ हो जाता हूँ कि 'तुम तो मेरे ही हो', नित्य मुझमें स्थित हो। 🙏जय श्री कृष्ण🌹
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