MyMandirInstall

*श्री महाकालेश्वर भस्म-आरती दिव्य स्वरूप* 🙏 *28-मई-2026 | गुरुवार* उज्जैन के राजा महाकाल का आज का भस्म-आरती श्रृंगार अद्भुत है। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे खास परंपरा है जो ब्रह्म मुहूर्त में होती है। *आज के दिव्य श्रृंगार के 9 मुख्य अंग:* *1. पुष्प श्रृंगार* गेंदा और सफेद फूलों की माला बाबा को अर्पित। ये महाकाल को अति प्रिय हैं। *2. दिव्य त्रिनेत्र एवं त्रिपुण्ड* मस्तक पर त्रिनेत्र और चंदन का त्रिपुण्ड। ये शिव के ज्ञान, वैराग्य और शक्ति का प्रतीक है। बीच में लाल बिंदी तीसरे नेत्र को दर्शाती है। *3. बेलपत्र अलंकरण* दोनों ओर बेलपत्र सजाए गए हैं। बेलपत्र शिव पूजा का सबसे पवित्र अर्पण माना जाता है। *4. महाकाल के नेत्र* आज बाबा के नेत्रों में अद्भुत तेज और करुणा दोनों का भाव दिख रहा है। भक्तों पर कृपा बरसाने वाले नेत्र। *5. अधर एवं मूंछ श्रृंगार* दिव्य अधर और गौरवमयी सफेद मूंछ से बाबा का स्वरूप राजसी आभा दे रहा है। ये महाकाल का विशिष्ट श्रृंगार है। *6. रुद्राक्ष एवं शंखाकार माला* कंठ में रुद्राक्ष और श्वेत काजू-बादाम की माला। ये शिव तत्व की पवित्रता और साधना का प्रतीक है। *7. भस्म एवं चंदन अलंकरण* बाबा के स्वरूप पर भस्म और चंदन की रेखाएं। भस्म वैराग्य का और चंदन शीतलता का संदेश देती हैं। *8. रजत आसन* बाबा महाकाल चांदी के कमलाकार आसन पर विराजमान हैं। ये दिव्यता और पावनता का अनुभव कराता है। *9. सुविचार* _"जहाँ महाकाल का स्मरण और भस्म का वैराग्य हो, वहीं आत्मा को सच्ची शांति प्राप्त होती है..."_ *भस्म आरती का महत्व:* ये दुनिया की एकमात्र ऐसी आरती है जहाँ शिवलिंग पर ताजी चिता की भस्म चढ़ाई जाती है। मान्यता है कि इससे काल पर भी विजय मिलती है। जय श्री माहाकल 🙏

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!