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Rama Devi Sahu

4 days ago

*अर्थी पर पड़े हुए शव पर लाल कपड़ा बाँधा जा रहा है। गिरती हुई गरदन को सँभाला जा रहा है। पैरों को अच्छी तरह रस्सी बाँधी जा रही है, कहीं रास्ते में मुर्दा गिर न जाए। गर्दन के इर्दगिर्द भी रस्सी के चक्कर लगाये जा रहे हैं। पूरा शरीर लपेटा जा रहा है। अर्थी बनाने वाला बोल रहा है: ‘तू उधर से खींच’ दूसरा बोलता है : ‘मैने खींचा है, तू गाँठ मार।’* *लेकिन यह गाँठ भी कब तक रहेगी? रस्सियाँ भी कब तक रहेंगी? अभी जल जाएँगी और रस्सियों से बाँधा हुआ शव भी जलने को ही जा रहा है बाबा! धिक्कार है इस नश्वर जीवन को! धिक्कार है इस नश्वर देह की ममता को! धिक्कार है इस शरीर के अभिमान को!* *अर्थी को कसकर बाँधा जा रहा है। आज तक तुम्हारा नाम सेठ, साहब की लिस्ट (सूची) में था। अब वह मुर्दे की लिस्ट में आ गया। लोग कहते हैं: ‘मुर्दे को बाँधो जल्दी से।’ अब ऐसा नहीं कहेंगे कि ‘सेठ को, साहब को, मुनीम को, नौकर को, संत को, असंत को बाँधो…’ पर कहेंगे, ‘मुर्दे को बाँधो।’* *हो गया हमारे पूरे जीवन की उपलब्धियों का अंत। आज तक हमने जो कमाया था वह हमारा न रहा। आज तक हमने जो जाना था वह मृत्यु के एक झटके में छूट गया। हमारे इन्कम टेक्स (आयकर) के कागजातों को, हमारे प्रमोशन और रिटायरमेन्ट की बातों को, हमारी उपलब्धि और अनुपलब्धियों को सदा के लिए अलविदा होना पड़ा।* *हाय रे मनुष्य! तेरा श्वास! हाय रे तेरी कल्पनाएँ! हाय रे तेरी नश्वरता! हाय रे मनुष्य; तेरी वासनाएँ! आज तक इच्छाएँ कर रहा था कि इतना पाया है और इतना पाँऊगा, इतना जाना है और इतना जानूँगा, इतना को अपना बनाया है और इतनों को अपना बनाँऊगा, इतनों को सुधारा है, औरों को सुधारुँगा।* *अरे! हम अपने को मौत से तो न बचा पाए! अपने को जन्म मरण से भी न बचा पाए! देखी तेरी ताकत! देखी तेरी कारीगरी बाबा !* *हमारा शव बाँधा जा रहा है। हम अर्थी के साथ एक हो गये हैं। शमशान यात्रा की तैयारी हो रही है। लोग रो रहे हैं। चार लोगों ने अर्थी को उठाया और घर के बाहर हमें ले जा रहे हैं। पीछे-पीछे अन्य सब लोग चल रहे हैं।* *कोई स्नेहपूर्वक आया है, कोई मात्र दिखावा करने आये है। कोई निभाने आये हैं कि समाज में बैठे हैं तो पाँच-दस आदमी सेवा के हेतु आये हैं। उन लोगों को पता नहीं कि उनकी भी यही हालत होगी। अपने को कब तक अच्छा दिखाओगे? अपने को समाज में कब तक ‘सेट’ करते रहोगे? सेट करना ही है तो अपने को परमात्मा में ‘सेट’ क्यों नहीं करते भैया?* *दूसरों की शवयात्राओं में जाने का नाटक करते हो? ईमानदारी से शवयात्राओं में जाया करो। अपने मन को समझाया करो कि तेरी भी यही हालत होनेवाली है। तू भी इसी प्रकार उठनेवाला है, इसी प्रकार जलनेवाला है। बेईमान मन! तू अर्थी में भी ईमानदारी नहीं रखता? जल्दी करवा रहा है? घड़ी देख रहा है? ‘आफिस जाना है… दुकान पर जाना है…’ अरे! आखिर में तो शमशान में जाना है ऐसा भी तू समझ ले। आफिस जा, दुकान पर जा, सिनेमा में जा, कहीं भी जा लेकिन आखिर तो शमशान में ही जाना है। तू बाहर कितना जाएगा?* *क्षण-क्षण हरि स्मरण में ही व्यतीत करो! पल-पल मृत्यु की और बढ़ रहे हो और संसार में बेहोश हो।*

Comments (20)

Kapil Tyagi

Kapil Tyagi

Sep 1, 2026

बहुत अच्छी बात लिखी है जय बजरंगबली

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 1, 2026

बुढ़ापा देने के पीछे भगवान का अद्भुत उद्देश्य 🙏🏼 यह लेख ऐसा है कि पढ़कर आँखें नम हो जाएँ... सारांश: एक बार इंसान ने भगवान से पूछा— “अगर आप चाहें तो इंसान को हमेशा जवान और जवान ही रख सकते हैं, है ना?” तब भगवान मुस्कुराकर बोले: 1. आँखों की रोशनी कम कर दी → ताकि उसे इस खूबसूरत दुनिया का मोह कम हो जाए। 2. शरीर पर झुर्रियाँ डाल दीं → ताकि उसे अपनी सुंदरता का मोह न रहे। 3. पैरों की चलने की ताकत कम कर दी → ताकि उसे घूमने-फिरने का मोह न रहे। 4. कानों को कमजोर कर दिया → ताकि दूसरों की बातें सुनने का मोह कम हो जाए। 5. बिस्तर पर रहने के लिए मजबूर कर दिया → ताकि जीवन से मोह धीरे-धीरे कम हो जाए। और फिर भगवान ने कहा: “अगर इंसान कभी बूढ़ा ही न होता, तो क्या वह इस खूबसूरत दुनिया का मोह छोड़कर मृत्यु को सहजता से स्वीकार कर पाता?” जवानी में मृत्यु हो जाए तो परिवार को वर्षों तक दुख रहता है। लेकिन बुढ़ापे में मृत्यु आए तो लोग उसे सहजता से स्वीकार कर लेते हैं और कुछ दिनों बाद जीवन सामान्य हो जाता है। इसीलिए भगवान ने इंसान के मोह को धीरे-धीरे कम करने के लिए बुढ़ापा बनाया। भावार्थ: बुढ़ापा कोई अभिशाप नहीं, बल्कि भगवान की कृपा है। यह धीरे-धीरे हमें दुनिया के मोह से मुक्त करता है, ताकि हम शांति और स्वीकार भाव के साथ जीवन के अंतिम पड़ाव को जी सकें। “बस, भगवान ने इंसान को इस मोह से मुक्त करने के लिए बुढ़ापा बनाया।” 🙏🏽 *बहुत गहरा और भावपूर्ण संदेश है।* 🙏🏼

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 1, 2026

बजरंगबली की कृपा से जीवन के हर संकट, भय और बाधा का अंत हो। मन में साहस, घर में सुख-शांति और हर काम में सफलता मिले। हे पवनपुत्र हनुमान, अपनी शक्ति और कृपा से हम सभी की रक्षा करना और श्रीराम के मार्ग पर चलने की शक्ति देना। ॐ हं हनुमते नमः। जय बजरंगबली! जय श्री राम! 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 1, 2026

बजरंगबली की कृपा से जीवन के हर संकट, भय और बाधा का अंत हो। मन में साहस, घर में सुख-शांति और हर काम में सफलता मिले। हे पवनपुत्र हनुमान, अपनी शक्ति और कृपा से हम सभी की रक्षा करना और श्रीराम के मार्ग पर चलने की शक्ति देना। ॐ हं हनुमते नमः। जय बजरंगबली! जय श्री राम! 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 1, 2026

Good Afternoon 😊 प्रभु जगन्नाथ की दया से बिगड़े काम बनते हैं, और हनुमान जी के स्मरण से मन के सारे भय और भ्रम मिटते हैं।🙏🏻🌺 आज के सुंदर दिन की शुरुआत प्रभु के दिव्य आशीर्वाद के साथ करें। आपका पूरा दिन सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहे। 🙏✨

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 1, 2026

जय श्री राधे कृष्ण 🙏 बहना जी ❤️🌹

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 1, 2026

राम जी की कृपा से आपके जीवन की नैया खुशियों के समुंदर में गोते लगाती रहे और बजरंगबली उसकी पतवार थामे रहें 🙏 इसी शुभकामना के साथ शुभ दोपहर वंदन मेरी प्यारी दी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 1, 2026

जय श्री राम 🙏 जय बजरंगबली 🙏 राम जी की कृपा और बजरंगबली जी का साथ आपको सदैव प्राप्त हो मेरी प्यारी दी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 1, 2026

जय श्री राधे कृष्ण दीदी 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 1, 2026

नसीहत .. वह सच्चाई है जिसे हम कभी ग़ौर से नहीं सुनते... और तारीफ ... वह धोखा है जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं... *🌻आपका दिन मंगलमय हो 🌻* ।। राम राम जी 🙏