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Rama Devi Sahu

305 days ago

मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या भी कहा जाता है, इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के पूजन का विधान है। मार्गशीर्ष अमावस्या का व्रत करने से कुंडली के दोष समाप्त होने की भी मान्यता है, इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 19 नवंबर, बुधवार को सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर शुरु होगी, एवं 20 नवंबर, गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर यह तिथि समाप्त होगी। इस दिन ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अभिषेक करने से पितृ दोष शांत होता है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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