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Rama Devi Sahu

22 days ago

🦚 क्या आप जानते हैं? भगवान श्रीकृष्ण ने मात्र 64 दिनों में सीखी थीं 64 अद्भुत कलाएं! ✨ भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा उज्जैन (अवंतिका) स्थित गुरु सांदीपनि के आश्रम में ग्रहण की थी। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि उन्होंने वहां केवल 64 दिन बिताए और उतने ही दिनों में 64 कलाओं (विद्याओं) में महारत हासिल कर ली! यद्यपि वे स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे और जन्म से ही सर्वज्ञ थे, लेकिन धरती पर एक साधारण मनुष्य के रूप में जन्म लेने के कारण, उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान किया और एक आदर्श विद्यार्थी की तरह गुरु के पास जाकर ये विद्याएं पुनः सीखीं। 📜 गुरु सांदीपनि के आश्रम में सीखी गईं 64 अद्भुत कलाओं की पूरी सूची: 1. नृत्य – नाचना। 2. वाद्य – तरह-तरह के बाजे (वाद्ययंत्र) बजाना। 3. गायन विद्या – सुरीली गायकी। 4. नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व बेहतरीन अभिनय। 5. इंद्रजाल – जादूगरी। 6. नाटक रचना – नाटक, आख्यायिका आदि की रचना करना। 7. सुगंध निर्माण – इत्र, तेल आदि सुगन्धित चीजें बनाना। 8. पुष्प श्रृंगार – फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना। 9. बेताल वशीकरण – बेताल आदि को वश में रखने की गुप्त विद्या। 10. बाल क्रीड़ा – बच्चों के खेल। 11. विजय विद्या – हर क्षेत्र में विजय प्राप्त कराने वाली विद्या। 12. मन्त्रविद्या – मंत्रों का गूढ़ ज्ञान। 13. शकुन-अपशकुन – प्रश्नों के उत्तर में शुभ-अशुभ बतलाना। 14. रत्न कला – रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना। 15. यन्त्र निर्माण – कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना। 16. सांकेतिक भाषा – गुप्त भाषा (Code language) बनाना। 17. जल बंधन – जल के प्रवाह को बांधना। 18. बेल-बूटे बनाना – चित्रकारी और नक्काशी। 19. उपहार रचना – देव पूजन में रंगीन चावल और फूलों से कलाकृतियां बनाना। 20. पुष्प शय्या – फूलों की सेज सजाना। 21. पक्षियों की भाषा – तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना व समझना। 22. वृक्षायुर्वेद – वृक्षों की चिकित्सा। 23. पशु-पक्षी क्रीड़ा – भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति। 24. उच्चाटन विधि – विरोधियों के मन को भ्रमित करना। 25. वास्तुकला – घर आदि बनाने की कारीगरी। 26. बुनाई कला – गलीचे, दरी आदि बनाना। 27. काष्ठ कला (बढ़ईगिरी) – लकड़ी की कारीगरी। 28. आसन निर्माण – पट्टी, बेंत, बाण आदि से पलंग व कुर्सी बनाना। 29. पाक कला – कई तरह की सब्जी, रस, मीठे पकवान बनाने की कला। 30. हस्त लाघव – हाथ की फूर्ती के काम (हाथ की सफाई)। 31. बहुरूपिया कला – चाहे जैसा वेष धारण कर लेना। 32. पेय निर्माण – तरह-तरह के पीने के स्वादिष्ट पदार्थ बनाना। 33. द्यूत क्रीड़ा – जुआ या पासे का खेल। 34. छन्द ज्ञान – समस्त छन्दों व वेदों का ज्ञान। 35. वस्त्र परिवर्तन – वस्त्रों को छिपाने या पल भर में बदलने की विद्या। 36. आकर्षण विद्या – दूर के मनुष्य या वस्तुओं को आकर्षित करना। 37. वस्त्र व आभूषण निर्माण – कपड़े और गहने बनाना। 38. पुष्प माला निर्माण – हार-माला आदि गूंथना। 39. विचित्र सिद्धियां – शत्रु को कमजोर करने वाली औषधियां व मंत्र प्रयोग। 40. कर्ण-पुष्प निर्माण – स्त्रियों की चोटी और कानों के लिए फूलों के गहने बनाना। 41. कठपुतली कला – कठपुतली बनाना और नाचना। 42. मूर्तिकला – प्रतिमा आदि बनाना। 43. पहेली ज्ञान – जटिल पहेलियां बूझना। 44. सूचिका कर्म (सिलाई) – कपड़ों की सिलाई, रफू व कसीदाकारी। 45. केश विन्यास – बालों की सफाई और सजावट का कौशल। 46. मन की बात जानना – मुट्ठी में छिपी चीज या मन की बात बता देना। 47. विदेशी भाषा ज्ञान – कई देशों की भाषाओं का ज्ञान। 48. मलेच्छ-काव्य ज्ञान – कूट संकेतों (Ciphers) को लिखने व समझने की कला। 49. धातु व रत्न परीक्षण – सोने, चांदी तथा रत्नों की शुद्धता परखना। 50. धातु कर्म – सोना-चांदी आदि बना लेना (कीमियागिरी)। 51. मणि ज्ञान – मणियों के रंग और गुणों को पहचानना। 52. खानों की पहचान – खदानों (Mines) की पहचान करना। 53. चित्रकारी – अद्भुत चित्र बनाना। 54. रंगाई कला – दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना। 55. शय्या-रचना – बिस्तर या शय्या को कलात्मक रूप से सजाना। 56. मणि-फर्श निर्माण – घर के फर्श को मोती और रत्नों से जड़ना। 57. कूटनीति – राजनीति और कूटनीति का गहरा ज्ञान। 58. ग्रंथ पठन चातुराई – ग्रंथों को पढ़ाने और समझाने की कला। 59. नवाचार (Innovation) – नई-नई बातें और विचार निकालना। 60. समस्यापूर्ति – किसी अधूरी बात या काव्य को पूरा करना। 61. कोश ज्ञान – समस्त शब्दकोशों का ज्ञान। 62. कटक रचना – श्लोक या काव्य में छूटे पद को मन से तुरंत पूरा करना। 63. छल विद्या – आवश्यकता पड़ने पर धर्म रक्षार्थ छल स

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