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Rama Devi Sahu

135 days ago

✨🍁 संत की संगति..............✍️ 🍁 एक संत जंगल में कुटिया बनाकर रहते थे। उस रास्ते से एक शिकारी निकलता था, वो जब भी वहां से निकलता तब संत को जरुर प्रणाम करता था। 🍁 एक दिन शिकारी ने संत से कहा कि बाबा मैं तो मृग का शिकार करता हूँ, आप किसका शिकार करने जंगल में बैठे रहते हैं ? 🍁 संत बोले - श्री कृष्ण का, और फूट फूट कर रोने लगे। 🍁 शिकारी बोला अरे, बाबा रोते क्यों हो ? मुझे बताओ वो दिखता कैसा है ? मैं उसे जरुर पकड़ के लगाऊंगा। 🍁 संत ने भगवान का वह मनोहारी स्वरुप वर्णन कर दिया कि वो सांवला सलोना है,माथे पर मोर पंख लगाता है, बांसुरी बजाता है। 🍁 किरात बोला :-- बाबा जब तक आपका शिकार पकड़ नहीं लाता, पानी भी नही पिऊंगा। 🍁 फिर वो एक जगह जाल बिछा कर बैठ गया। 3 दिन बीत गए प्रतीक्षा करते करते, दयालु ठाकुर को दया आ गयी, वो भला दूर कहाँ है। 🍁 बांसुरी बजाते हुए आ गए और खुद ही जाल में फंस गए। किरात तो उनकी भुवन मोहिनी छवि के जाल में खुद फंस गया और एक टक श्याम सुंदर को निहारते हुए, शिकारी की आंखों से अश्रु धारा बहाने लगी। 🍁 थोड़ी देर बाद जब कुछ चेतना हुयी तो बाबा का स्मरण आया और जोर जोर से चिल्लाने लगा शिकार मिल गया, शिकार मिल गया, शिकार मिल गया..... 🍁 शिकारी ठाकुर जी की ओर देख कर बोला, अच्छा बच्चू तीन दिन से भूखा प्यासा रखा मुझे, अब मिले हो, और अब भी मुझ पर जादू कर रहे हो। 🍁 श्यामसुंदर उसके भोले पन पर रीझे जा रहे थे एवं मंद मंद मुस्कान लिए उसे देखे जा रहे थे। 🍁 शिकारी, कृष्ण जी को शिकार की भांति अपने कंधे पे डाल कर और संत के पास ले आया। 🍁 लो बाबा, आपका शिकार ले लाया हुँ... ...... बाबा ने जब ये दृश्य देखा तो क्या देखते हैं शिकारी के कंधे पे श्री कृष्ण हैं और जाल में से मुस्कुरा रहे हैं। 🍁 संत के तो होश उड़ गए, संत शिकारी के चरणों में गिर पड़े, फिर ठाकुर जी से कातर वाणी में बोले -- 🍁 हे नाथ! मैंने बचपन से अब तक इतने प्रयत्न किये, आप को अपना बनाने के लिए घर बार छोडा, इतना भजन किया आप नही मिले और इसे 3 दिन में ही मिल गए। 🍁 भगवान बोले - इसका तुम्हारे प्रति निश्छल प्रेम व कहे हुए वचनों पर दृढ़ विश्वास से मैं रीझ गया और मुझ से इसके समीप आये बिना रहा नहीं गया। 🍁 भगवान तो भक्तों के संतों के आधीन ही होतें हैं। जिस पर संतों की कृपा दृष्टि हो जाय उसे तत्काल अपनी सुखद शरण प्रदान करतें हैं। 🍁 शिकारी तो जानता भी नहीं था की भगवान कौन हैं। पर संत को रोज़ प्रणाम करता था* संत प्रणाम और दर्शन का फल ये है कि 3 दिन में ही ठाकुर मिल गए। 🍁 यही होता है संत की संगति का परिणाम !! ✨संत मिलन को जाईये तजि ममता अभिमान ! ✨ज्यो ज्यो पग आगे बढे कोटिन्ह यज्ञ समान" 🌿❗🌿🙏🙏🌿❗🌿

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Comments (7)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Apr 19, 2026

जी रमा जी 🙂🙏💕💞💕💞

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 18, 2026

Shubha Ravivar ki Hardik Shubhkamnaye ke Sath Suprabhat Jii 🙏🌹🌹

Rohit  Patel

Rohit Patel

Apr 18, 2026

Ji 💕 💞💕💞💕

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 18, 2026

Good Afternoon Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 18, 2026

Ji Namaste 🙏 Shanivar Subah ki Ram Ram Jii 🙏🌹🌹

Rohit  Patel

Rohit Patel

Apr 17, 2026

🔱🌿📿✋💕💞💕💞