
Rama Devi Sahu
261 days ago
*ना तीन में, ना तेरह में* 🤔 आप ने ये कहावत तो सुनी होगी कि *ना तीन में न तेरह में..* आज आपको इसकी कहानी बताते हैं कि इस मुहावरे की उत्पति कैसे और क्यों हुई?? चलिए जानते हैं... एक नगर सेठ थे। अपनी पदवी के अनुरुप वे अथाह दौलत के स्वामी थे। घर, बंगला, नौकर-चाकर थे। एक चतुर मुनीम भी थे जो सारा कारोबार संभाले रहते थे। किसी समारोह में नगर सेठ की मुलाकात नगर-वधु से हो गई। नगर-वधु यानी शहर की सबसे खूबसूरत वेश्या। अपने पेशे की जरुरत के मुताबिक नगर-वधु ने मालदार व्यक्ति जानकर नगर सेठ के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया। फिर उन्हें अपने घर पर भी आमंत्रित किया। सम्मान से अभिभूत सेठ, दूसरे-तीसरे दिन नगर-वधु के घर जा पहुँचे। नगर-वधु ने आतिथ्य में कोई कमी नहीं छोड़ी। खूब आवभगत की और यकीन दिला दिया कि वह सेठ से बेइंतहा प्रेम करने लगी है। अब नगर-सेठ जब-तब नगर-वधु के ठौर पर नजर आने लगे। शामें अक्सर वहीं गुजरने लगीं। नगर भर में खबर फैल गई। काम-धंधे पर असर होने लगा। मुनीम की नजरें इस पर टेढ़ी होने लगीं। एक दिन सेठ को बुखार आ गया। तबियत कुछ ज्यादा बिगड़ गई। कई दिनों तक बिस्तर से नहीं उठ सके। इसी बीच नगर-वधु का जन्मदिन आया। सेठ ने मुनीम को बुलाया और आदेश दिया कि एक हीरों जड़ा नौलखा हार खरीदा जाए और नगर-वधु को उनकी ओर से भिजवा दिया जाए। निर्देश हुए कि मुनीम खुद उपहार लेकर जाएँ। मुनीम तो मुनीम था। खानदानी मुनीम। उसकी निष्ठा सिर्फ सेठ के प्रति भर नहीं थी। उसके पूरे परिवार और काम धंधे के प्रति भी थी। उसने सेठ को समझाया कि वे भूल कर रहे हैं। मुनीम ने बताने की कोशिश कि वेश्या किसी व्यक्ति से प्रेम नहीं करती, पैसों से करती है। मुनीम ने उदाहरण देकर समझाया कि नगर-सेठ जैसे कई लोग प्रेम के भ्रम में वहाँ मंडराते रहते हैं। लेकिन सेठ को ना समझ में आना था, ना आया। सेठ ने सख्ती से कहा कि मुनीम नगर-वधु के पास तोहफा पहुँचा आएँ। मुनीम क्या करते !! एक हीरों जड़ा नौलखा हार खरीदा और नगर-वधु के घर की ओर चल पड़े। लेकिन रास्ते भर वे इस समस्या को निपटाने का उपाय भी सोचते रहे। नगर-वधु के घर पहुँचे तो नौलखा हार का डब्बा खोलते हुए कहा, “यह तोहफा उसकी ओर से जिससे तुम सबसे अधिक प्रेम करती हो।” नगर-वधु ने फटाफट तीन नाम गिना दिए। मुनीम को आश्चर्य नहीं हुआ कि उन तीन नामों में सेठ का नाम नहीं था। निर्विकार भाव से उन्होंने कहा, “देवी, इन तीन में तो उन महानुभाव का नाम नहीं है जिन्होंने यह उपहार भिजवाया है।” नगर-वधु की मुस्कान गायब हो गई। सामने चमचमाता नौलखा हार था और उससे भारी भूल हो गई थी। उसे उपहार हाथ से जाता हुआ दिखा। उसने फौरन तेरह नाम गिनवा दिए। तेरह नाम में भी सेठ का नाम नहीं था। लेकिन इस बार मुनीम का चेहरा तमतमा गया। ग़ुस्से से उन्होंने नौलखा हार का डब्बा उठाया और खट से उसे बंद करके उठ गए। नगर-वधु गिड़गिड़ाने लगी। उसने कहा कि उससे भूल हो गई है। लेकिन मुनीम चल पड़े। बीमार सेठ सिरहाने से टिके मुनीम के आने की प्रतीक्षा ही कर रहे थे। नगर-वधु के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुनीम पहुचे और हार का डब्बा सेठ के सामने पटकते हुए कहा, “लो, अपना नौलखा हार, न तुम तीन में न तेरह में। यूँ ही प्रेम का भ्रम पाले बैठे हो।” सेठ की आँखें खुल गई थीं। इसके बाद वे कभी नगर-वधु के दर पर नहीं दिखाई पड़े। *पोस्ट जानकारी अच्छी लगे तो अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं और पुण्य कमाएं..* आप सभी का दिन शुभ हो 🙏🏻😊

Comments (6)

Rama Devi Sahu
Dec 13, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Jai Bajrangbali Hanuman 🙏 Bhagwan Shri Ram or Bajarangi Hanuman Ji ki Aasirbad Aap or Aap ke Pure Parivar pr Hamesha Bani Rahe 🙏 Aap ka Ratri Subha Mangalmay Ho 🙏 Apne Khayal Rakhna or Apno ko bhi...😊❤️🌹❤️

Rama Devi Sahu
Dec 13, 2025
Thanks 😊 Subha Ratri Jii Meri Pyari Behen ❤️🌹❤️

Rama Devi Sahu
Dec 13, 2025
Jai Shree Radhe Krishna Jii 🙏😊 Bahana 🌹🌹❤️🌹🌹

Saumya Sharma
Dec 13, 2025
बहुत ही सुन्दर पोस्ट 👌👌👌 के साथ बहुत ही सुन्दर कहानी 👌 यही आज के जमाने का सच है, ठाकुर जी की कृपा आप सपरिवार पर सदैव ही बनी रहे 🙏 यही प्रार्थना है 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Dec 13, 2025
जय श्री राम 🙏 जय बजरंगबली 🙏 जय शनिदेव 🙏 आपको सदैव राम जी का आशीर्वाद, बजरंगबली का साथ और शनिदेव जी की शीतल छाया प्राप्त हों 🙏 राम जी की कृपा से आप स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों के साथ हँसते मुस्कुराते रहें 🙏 🌹☺️ इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम मेरी प्यारी बहन 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Dec 13, 2025
जय श्री राधे कृष्ण बहना जी 🙏🌹☺️
