
Rama Devi Sahu
266 days ago
एक गृहस्थ भक्त अपनी जीविका का आधा भाग घर में दो दिन के खर्च के लिए पत्नी को देकर अपने गुरुदेव के पास गया । दो दिन बाद उसने अपने गुरुदेव को निवेदन किया के अभी मुझे घर जाना है। मैं धर्मपत्नी को दो ही दिन का घर खर्च दे पाया हूं । घर खर्च खत्म होने पर मेरी पत्नी व बच्चे कहाँ से खायेंगे । गुरुदेव के बहुत समझाने पर भी वो नहीं रुका। तो उन्होंने उसे एक चिट्ठी लिख कर दी। और कहा कि रास्ते में मेरे एक भक्त को देते जाना। वह चिट्ठी लेकर भक्त के पास गया। उस चिट्ठी में लिखा था कि जैसे ही मेरा यह भक्त तुम्हें ये खत दे तुम इसको 6 महीने के लिए मौन साधना की सुविधा वाली जगह में बंद कर देना। उस गुरु भक्त ने वैसे ही किया। वह गृहस्थी शिष्य 6 महीने तक अन्दर गुरु पद्धत्ति नियम, साधना करता रहा परंतु कभी कभी इस सोच में भी पड़ जाता कि मेरी पत्नी का क्या हुआ, बच्चों का क्या हुआ होगा ?? उधर उसकी पत्नी समझ गयी कि शायद पतिदेव वापस नहीं लौटेंगे।तो उसने किसी के यहाँ खेती बाड़ी का काम शुरू कर दिया। खेती करते करते उसे हीरे जवाहरात का एक मटका मिला। उसने ईमानदारी से वह मटका खेत के मालिक को दे दिया। उसकी ईमानदारी से खुश होकर खेत के मालिक ने उसके लिए एक अच्छा मकान बनवा दिया व आजीविका हेतु ज़मीन जायदात भी दे दी । अब वह अपनी ज़मीन पर खेती कर के खुशहाल जीवन व्यतीत करने लगी। जब वह शिष्य 6 महिने बाद घर लौटा तो देखकर हैरान हो गया और मन ही मन गुरुदेव के करुणा कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने लगा कि सद्गुरु ने मुझे यहाँ अहंकार मुक्त कर दिया । मै समझता था कि मैं नहीं कमाकर दूंगा तो मेरी पत्नी और बच्चों का क्या होगा ?? करनेवाला तो सब परमात्मा है। लेकिन झूठे अहंकार के कारण मनुष्य समझता है कि मैं करनेवाला हूं। वह अपने गुरूदेव के पास पहुंचा और उनके चरणों में पड़ गया। गुरुदेव ने उसे समझाते हुए कहा बेटा हर जीव का अपना अपना प्रारब्ध होता है और उसके अनुसार उसका जीवन यापन होता है। मैं भगवान के भजन में लग जाऊंगा तो मेरे घरवालों का क्या होगा ?? मैं सब का पालन पोषण करता हूँ मेरे बाद उनका क्या होगा यह अहंकार मात्र है। वास्तव में जिस परमात्मा ने यह शरीर दिया है उसका भरण पोषण भी वही परमात्मा करता है। *प्रारब्ध पहले रच्यो पीछे भयो शरीर* *तुलसी चिंता क्या करे भज ले साहेब कबीर* बहुत दूर दुर तक घुम लिया ज़िंदगी में दोस्तों..* *बस ये जानने के लिए कि नज़दीक कौन है...* *सभी शब्दों का अर्थ मिल सकता है* *परन्तु* *जीवन का अर्थ* *जीवन जी कर* *और* *सबंध का अर्थ* *सबंध निभाकर ही मिल सकता है।*

Comments (7)

Rama Devi Sahu
Dec 7, 2025
Ji Namaste 🙏 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Dec 7, 2025
Good 😊 Night 🌹

Rohit Patel
Dec 7, 2025
जी रमा जी 👌✔️👏👏👏💞

Sanju ❤️
Dec 7, 2025
sahi h

Rama Devi Sahu
Dec 7, 2025
Dhanyawad 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏 Bhagwan ki Aasirbad Aap or Aap ke Pure Parivar pr Hamesha Banaye Rakhe 🙏 Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Dec 7, 2025
Ji Shukriya 🙏 Good 😊 Afternoon Jii 🙏 Bhagwan ki Aasirbad se Aap or Aap ke Pure Parivar pr Hamesha Banaye Rakhe 🙏 Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

H.S.CHAHAR
Dec 7, 2025
🌹🙏जय श्री कृष्णा जय श्री राधे राधे जी बहुत सुंदर लगा यह पोस्ट भगवान आपको हमेशा खुश रखे और ऐसी पोस्ट डालते रहो जय श्री कृष्णा जी 🌹🙏
