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Rama Devi Sahu

7 days ago

स्कंदमाता (Skandamata)🙏🙏 बुद्धिमता, ज्ञान की देवी: माँ स्कंदमाता। देवी माँ का पाँचवां रूप स्कंदमाता के नाम से प्रचलित है। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कन्द भी है जो ज्ञानशक्ति और कर्मशक्ति के एक साथ सूचक हैं। स्कन्द इन्हीं दोनों के मिश्रण का परिणाम है। स्कन्दमाता वह दैवीय शक्ति हैं, जो व्यवहारिक ज्ञान को सामने लाती हैं – वह जो ज्ञान को कर्म में बदलती हैं। शिव तत्व आनंदमय, सदैव शांत और किसी भी प्रकार के कर्म से परे का सूचक है। देवी तत्व आदिशक्ति सब प्रकार के कर्म के लिए उत्तरदायी है। ऐसी मान्यता है कि देवी इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति और क्रिया शक्ति का समागम है। जब शिव तत्व का मिलन इन त्रिशक्ति के साथ होता है तो स्कन्द का जन्म होता है। स्कंदमाता ज्ञान और क्रिया के स्रोत, आरम्भ का प्रतीक है। इसे हम क्रियात्मक ज्ञान अथवा सही ज्ञान से प्रेरित क्रिया या कर्म भी कह सकते हैं। प्रायः ऐसा देखा गया है कि ज्ञान तो है, किंतु उसका कुछ प्रयोजन या क्रियात्मक प्रयोग नहीं होता। किन्तु ज्ञान ऐसा भी है, जिसका ठोस प्रयोजन, लाभ है, जिसे क्रिया द्वारा अर्जित किया जाता है। आप स्कूल, कॉलेज में भौतिकी, रसायन शास्त्र पढ़ते हैं जिसका प्रायः आप दैनिक जीवन में कुछ अधिक प्रयोग नहीं करते हैं। और दूसरी ओर चिकित्सा पद्धति, औषधि शास्त्र का ज्ञान दिन प्रतिदिन में अधिक उपयोग में आता है। जब आप टेलीविजन ठीक करना सीख जाते हैं तो अगर कभी वह खराब हो जाए तब आप उस ज्ञान का प्रयोग कर टेलीविजन ठीक कर सकते हैं। इसी तरह जब कोई मोटर खराब हो जाती है और यदि आप उसे ठीक करना जानते हैं तो उस ज्ञान का उपयोग कर उसे ठीक कर सकते हैं। इस प्रकार का ज्ञान अधिक व्यवहारिक ज्ञान है। अतः स्कन्द सही व्यवहारिक ज्ञान और क्रिया के एक साथ होने का प्रतीक है। स्कन्द तत्व मातृ देवी का एक और रूप है। हम अक्सर कहते हैं, कि ब्रह्म सर्वत्र, सर्वव्यापी है, किंतु जब आपके सामने कोई चुनौती या मुश्किल स्थिति आती है, तब आप क्या करते हैं? तब आप किस प्रकार कौन सा ज्ञान लागू करेंगे या प्रयोग में लाएँगे? समस्या या मुश्किल स्थिति में आपको क्रियात्मक होना पड़ेगा। अतः जब आपका कर्म सही व्यवहारिक ज्ञान से लिप्त होता है तब स्कन्द तत्व का उदय होता है। और देवी दुर्गा स्कन्द तत्व की माता हैं। स्कंदमाता की पूजा में कौन से मन्त्र का जप करें? ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमतायै नम:’ के जप से आप माँ दुर्गा के पाँचवें स्वरुप माँ स्कंदमाता का आवाहन कर सकते हैं । नवरात्रि की पंचमी को पहनें पीले रंग के कपड़े। पंचमी: पीला रंग खुशी और जयकार का रंग है, जो कि देवी के प्रतीक हैं।

Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 15, 2026

🌺👑 माँ स्कंदमाता — ममता, शक्ति और दिव्य आशीर्वाद का स्वरूप 🙏✨ 🦁 नवदुर्गा का पंचम दिव्य स्वरूप, माँ स्कंदमाता प्रेम, करुणा, मातृत्व और असीम शक्ति की प्रतीक हैं। 🌸❤️ 🙏 भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को अपनी गोद में धारण करने वाली माँ अपने भक्तों पर ममता और कृपा बरसाती हैं। 🌼 माँ स्कंदमाता की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास हो। ❤️🌺 जय माता दी! जय माँ स्कंदमाता! 🙏🔱

Savita om namah shivay 🙏🌹

Savita om namah shivay 🙏🌹

Oct 15, 2026

"माँ स्कंदमाता की गोद में कुमार कार्तिकेय हैं, उनकी करुणा में ही संसार का सारा सुख समाया है। नवरात्रि के पांचवें दिन माँ आपके जीवन को खुशियों से भर दें।" ✨