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Rama Devi Sahu

309 days ago

🚩🌺 छठ पूजा-2025 🌺‼️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 छठ पूजा एक चार-दिवसीय हिंदू पर्व है, जिसे मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। 2025 में इस पर्व की तिथियाँ निम्नलिखित हैं: *प्रथम दिवस –नहाय‑खाय शनिवार,25 अक्टूबर 2025* *द्वितीय दिवस –खरना रविवार, 26 अक्टूबर 2025* *तृतीय दिवस – संध्या अर्घ्य, सोमवार, 27 अक्टूबर 2025* *चतुर्थ दिवस – उषा अर्घ्य, मंगलवार,28 अक्टूबर 2025* इस प्रकार, छठ पूजा 2025 में 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। प्रत्येक दिन का अर्थ और कर्मकाण्ड *नहाय-खाय (25 अक्टूबर)* पहले दिन व्रती महिलाएँ या पूजा करने वाले नदी, तालाब या जल-स्रोत में स्नान कर अपनी पूजा-प्रक्रिया आरंभ करते हैं। इस दिन सादा सत्वाहारी भोजन लिया जाता है, जिसमें प्याज-लहसुन नहीं होता। *खरना (26 अक्टूबर)* दूसरे दिन दिनभर व्रत रहता है (खाने-पीने-जल के संबंध में नियमों के साथ)। शाम में विशेष प्रसाद जैसे गुड़-खीर, रोटी आदि तैयार किए जाते हैं। इसके बाद व्रत को आगे बढ़ाया जाता है। *संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर)* तीसरे दिन शाम के समय व्रती जल-स्रोत के किनारे खड़े होकर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान विशेष प्रसाद, खरना की तैयारी, सोप (जूड़े का टोकरी) आदि शामिल होते हैं। *उषा अर्घ्य (28 अक्टूबर)* अंतिम दिन प्रातःकाल उठकर उदयमान सूर्य को अर्घ्य देते हुए व्रत पूर्ण किया जाता है। इस दिन व्रत खोलने का समय भी महत्वपूर्ण होता है। *पर्व का महत्व* यह पर्व सूर्य देव (सूर्य देव) तथा ‎छठी मैया की पूजा के लिए समर्पित है — सूर्य को जीवन-ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। छठ वैसे भी प्रकृति-पूजा का प्रतीक माना जाता है: जल-शुद्धि, व्रत-संयम, सामूहिक मिलन, नदी-तट पर आराधना आदि। यह परिवार, संतान की सुरक्षा, स्वास्थ्य व समृद्धि हेतु श्रद्धा से किया जाता है। *क्यों विशेष है यह पर्व* अन्य हिन्दू पर्वों की तरह इसमें खाने-पीने का आनंद भी है, लेकिन संयम, व्रत और प्रकृति-साक्षात्कार की विशेषता भी है। जल, सूर्य, तप, व्रत ये सभी तत्व मिलकर एक गहरी आध्यात्मिक प्रक्रिया बनाते हैं। विशेष रूप से बिहार-झारखण्ड में यह पर्व सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ नदी-तट पर परिवार-सामूहिक पूजा का दृश्य बहुत भावभीना होता है। *ध्यान देने योग्य बातें* व्रत करने वाले को पर्याप्त तैयारी करनी पड़ती है — जैसे स्नान, पूजा-स्थान की सफाई, प्रसाद-सामग्री का इंतज़ाम। नदी या तालाब के किनारे पूजा के लिए समय-सारणी देखना महत्वपूर्ण है — जैसे सूर्य अस्त या उदय के समय। यदि आप कहीं गाँव या नदीतट जाते हैं तो धैर्य, संयम और पर्यावरण-सुरक्षा का ध्यान रखें — बहुत-से लोग आने-जाने के कारण सफाई आदि समस्याओं का सामना कर सकते हैं। *पर्व के दौरान स्थानीय मौसम व जल-स्तर आदि का ध्यान देना फायदेमंद रहेगा।* 🌷🙏🌻ॐ सूर्य देवाय नमः🌻🙏🌷

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