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Rama Devi Sahu

154 days ago

*नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी।* *रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये!!* रासमण्डल में निवास करने वाली हे परमेश्वरि ! आपको नमस्कार है। श्रीकृष्ण को प्राणों से भी अधिक प्रिय हे रासेश्वरि ! आपको नमस्कार है। *नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे।* *ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।।* ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं के द्वारा वन्दित चरणकमल वाली हे त्रैलोक्यजननी ! आपको नमस्कार है। हे करुणार्णवे ! आप मुझ पर प्रसन्न होइए। *नम: सरस्वतीरूपे नम: सावित्रि शंकरि।* *गंगापद्मावनीरूपे षष्ठि मंगलचण्डिके।।* हे सरस्वतीरूपे ! आपको नमस्कार है। हे सावित्रि ! हे शंकरि ! हे गंगा-पद्मावतीरूपे ! हे षष्ठि ! हे मंगलचण्डिके ! आपको नमस्कार है। *नमस्ते तुलसीरूपे नमो लक्ष्मीस्वरुपिणी।* *नमो दुर्गे भगवति नमस्ते सर्वरूपिणी।।* हे तुलसीरूपे ! आपको नमस्कार है।हे लक्ष्मीस्वरूपिणि ! आपको नमस्कार है। हे दुर्गे ! हे भगवति ! आपको नमस्कार है।हे सर्वरूपिणि ! आपको नमस्कार है। *मूलप्रकृतिरूपां त्वां भजाम: करुणार्णवाम्।* *संसारसागरादस्मदुद्धराम्ब दयां कुरु।।* (श्रीमद्देवीभागवत ९।५०।४६-५०) हे अम्ब ! मूलप्रकृतिस्वरूपिणी तथा करुणासिन्धु आप भगवती की हम उपासना करते हैं, संसार-सागर से हमारा उद्धार कीजिए, दया कीजिए। स्तोत्र पाठ का फल जो मनुष्य तीनों कालों (प्रात:, मध्याह्न और सायं) में श्रीराधा का स्मरण करते हुए इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके लिए कभी कोई भी वस्तु अलभ्य (दुर्लभ) नहीं रहती और देह-त्याग के बाद वह गोलोकधाम में रासमण्डल में निवास करता है। श्रीराधाजी से प्रार्थना *कृपा करौ श्रीराधिका बिनवौं बारम्बार।* *बनी रहै स्मृति मधुर सुचि मंगलमय सुख सार।।* *श्रद्धा नित बढ़ती रहै बढ़ै नित्य विश्वास।* *अर्पण हों अवशेष अब जीवन के सब श्वास।।* (भाई जी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार) 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏

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