
प्रभा त्रिपाठी
438 days ago
आज के विचार “श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा-105” ( यमुना तट पै विरहाकुल बृजजन ) 18, 6, 2025 ***************************************** कल तै आगै कौ प्रसंग - मैं मधुमंगल ..... प्रेम कौ रहस्य तौ जे बृजजन ही समझें हैं । प्रेम के कारण ही तौ परब्रह्म इनके आगे पीछे डोल रह्यो है ....नही तौ कहा है इन बृजवासिन के पास । न वर्ण , न शुचिता , न सभ्यता, कुछ भी तौ नही हैं इन के पास । हाँ प्रेम है ...और विशुद्ध प्रेम है, जाके कारण परब्रह्म इनके यहाँ खेलौ करै है । प्रेम इतनौं कि जे बृजवासी कन्हैया के बिना अपने जीवन की कल्पना हूँ नाँय कर सकें हैं । या कालिदह की लीला में मैंने अनुभव कियौ कि ....इन बृजवासिन कौ प्रेम कन्हैया के प्रति अद्भुत है ..........अरे ! जब मैंने बिलख के मैया कूँ बतायौ कि कन्हैया तौ कूद गयौ कालीदह में .....तौ मैया हूँ नही , जितनी वहाँ गोपी हीं , गोप हे ...सब ऐसे है गए जैसे जल बिन मीन । मेरे कन्हैया के भक्त तौ अनेक भए हैं , और आगे भी होंगे ...लेकिन बृजवासिन कौ कोई जोड़ नही है ........सब मोते बोले ...मधुमंगल ! चल , कारीदह में चल । हम सब विरहाकुल चल दिए कारीदह की ओर । मार्ग में चरण चिन्ह दिखाई दै रहे कन्हैया के , तौ सब उनकूँ देखके और रोयवे लग रहे । दाऊ भैया आगे हे .....हम सब उनके पीछे । लेकिन मैंने देख्यो कि दाऊ भैया कूँ कोई दुःख नही है .....वो सहज चल रहे हैं ....जैसे कछु भयौ ही नही हैं । अब हम यमुना के बा हृद में पहुँच गए हे ....कालीदह में । यहीं कूदो है कन्हैया .....मैंने कही । दाऊ भैया तौ शान्त भाव तै वहीं बैठ गये .....उनके मुखमण्डल में मुस्कुराहट है .....वो यमुना कूँ देख रहे हैं । और मैया बृजरानी ....... मेरौ लाला यहीं गयौ है ....ओह ! यामें तौ कालियनाग रहे है.....बाकौ विष भयानक है ....मेरे लाला कूँ खाय गयौ होयगौ नाग ....मैया चीख रहीं हैं ....दो चार गोपिन ने मैया कूँ पकड़ राख्यो है .....लेकिन मैया हैं कि .....मैं भी जाऊँगी ...मैं भी अपने लाला के संग मर जाऊँगी .....मोकूँ यमुना में कूदन दो । मैया पछाड़ खाय के रोय रही है । वहाँ कौन विरह में नहीं डूबा था ....सबरे जितने बृज के लोग हे ...सब बिलख रहे । लेकिन अब तौ ....बृजराज बाबा हूँ उठे और यमुना हृद के पास गए .....नेत्रन ते बृजराज के अश्रु बह रहे हैं ......फिर मुड़के पीछे हम सबकूँ बाबा ने देख्यो ....बोले ....लाला के बिना मैं जीवन जी नाँय पाऊँगौ या लिए भैयाओ मैं जाय रो हूँ ...बृज कौ ध्यान रखियौं । इतने धीर गम्भीर बृजराज बाबा देह त्यागवे कूँ तैयार हैं ! तभी ...दाऊ भैया ने देख लियौ कि बाबा बृजराज कूद रहे हैं यमुना में ...वो दौड़े और आय के बाबा कूँ पकड़ लियौ ....मैया बृजरानी हूँ रोती भई कूदवे कूँ तैयार , मैया कूँ हूँ दाऊ ने सम्भाल लियौ ....और शान्त गम्भीर स्वर में बोले .....बाबा ! मैया ! का कर रहे हो आप लोग ? बाबा बोले ...दाऊ ! कन्हैया के बिना जे जीवन व्यर्थ है । किन्तु कन्हैया गयौ कहाँ है ? दाऊ ने हंसते भए कही ....दाऊ कूँ हँसतौ देख बाबा और मैया बाकी हम सब हूँ स्तब्ध से है गए हे । हाँ , बताओ बाबा ! का भयौ है जो आप इतने अधीर है कै प्राण त्याग रहे हैं । दाऊ भैया ने जब पूछी ...तौ मैया बोली .....कन्हैया या हृद में कूद गयौ है । तौ ? दाऊ पूछ रहे हैं । मैया ! कन्हैया तौ ऐसे यमुना में नित्य कूदतौ रे । आज कूद गयौ तौ कहा भयौ ? दाऊ की बात सुनके बाबा बोले .....दाऊ ! यामें कालीय नाग रहे है । और बा नाग में भयानक विष है ...मैया हूँ बोलीं । दाऊ भैया हँस पड़े .....कालीय नाग कहा बिगाड़ेगौ कन्हैया कौ ! दाऊ ! बा नाग के एक सौ एक फन हैं ...बृजराज बाबा बोले ....तौ या बात में हंसते भए दाऊ ने कही .....बाबा ! मैया ! तेरौ लाला तौ एक हजार फन वाले शेषनाग में शयन करवे वारौ है .....अरी मैया ! विचार कर जो हजार फन वारे शेषनाग में सोवे बा कौ जे कालिय नाग कहा बिगारैगौ । बाबा ! विचार करौ जो विधाता ब्रह्मा कौ हू बाप है ...महालक्ष्मी जाकी घरवारी है .....सम्पूर्ण विश्व जगत जाकौ आहार है ....और बाबा ! मृत्यु जाके भोजन की चटनी है ....बाकौ कोई बाल हूँ बाँकौ कर सके का ? जे कहते भए आवेश में आय गए हैं हमारे दाऊ भैया .....उनके नेत्र लाल है गए हैं ......अपने चरण पटकते भए दाऊ बोले ......मैं कह रह्यो हूँ कन्हैया कूँ कछु नही होयगौ । अब तौ जो होयगौ बा कालियनाग कौ ही होयगौ । इतनौं कहके दाऊ भैया शान्त है गए ......मैया बैठ गयी है , सुबक रही है ....बाबा हूँ अब दाऊ कूँ देख रहे हैं । अब सब दाऊ भैया के भरोसे हैं । क्रमशः Hari sharan
Comments (2)

Deepak karki
Jun 18, 2025
radhe radhe ji 🙏🌹

Rama Devi Sahu
Jun 18, 2025
Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe Jii 🙏🌹🌹
