
Rama Devi Sahu
292 days ago
कोई बन्धन नहीं है दोस्तों किसी भी आत्मा का दूसरी आत्मा से मां जननी है पिता पालन कर्ता बहन और भाई से रिश्ता है क्यों कि एक ही माता-पिता की संतानें हैं! मतलब पहला गुरुकुल है घर हमारा जहां पर जन्म लिया है! उसके उपरांत सांसारिक शिक्षा के लिए शिक्षक के सुपुर्द कर दिया जाता है दोस्तों सच्चाई है स्वीकार कर लेना चाहिए प्रत्येक मनुष्य को,, सृष्टि आदि काल से निर्मित है क्योंकि माता-पिता भी तो इस स्थिति से गुज़र चुके हैं हमारे,, दोस्तों यही क्रम है जो कि प्रकृति में ईश्वर द्वारा निर्देशित और संचालित है,, किसी का कोई भी दख़ल नहीं हो सकता है क्योंकि सृष्टि का संचालन और समय अनुपालन सुनिश्चित है यहां पर (धरती पर),, मित्रों! लगता ज़रूर है कि मेरे द्वारा सब कुछ हो रहा है जबकि एक अन्जान शक्ति है जो हमसे सब कुछ करवा रही है और उस आदि शक्ति का नाम है ईश्वर, अल्लाह,ईसा,मूसा और वाहिगुरू। जिस नाम से जानिए उसी नाम से मानिए,, इस को प्रथा कहें कथा कहें या फिर व्यथा कहें हम सभी लोग चलना तो ऐसे ही पड़ता है दोस्तों!नाम जपिए तभी प्राप्ति होती है बुराई में चाहे अच्छाई में या फिर मतलब के लिए,, इच्छा की पूर्ति तो तभी होती है दोस्तों! दोस्तों अपना अनुभव साझा किया है क्योंकि आस्था है तो रास्ता वरन् कोई भी नहीं है वास्ता (ईश्वर से आप का और आप से ईश्वर का) मतलब जीवन लीला का अन्तिम समय,, जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों सत्य हैं तीन काल हैं दोस्तों!




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