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🌸 श्रीमंदिर में महाप्रभु का रुक्मिणी हरण और विवाह उत्सव 🌸 || श्री श्री लक्ष्मीजगन्नाथाभ्याम् नमः || जय जय जगन्नाथ सूर्यवंश समुद्भवः रुक्मिणीपति देवेश शेषछत्र सुशोभितः आञ्जनेय प्रियः शान्तः रामरूपी सुवन्दितः कुर्वन्तु मङ्गलं क्षेत्रे भक्तानां प्रियवादिनां ओडिशा के एकाधिपति सम्राट, कोटिब्रह्मांड नाथ श्री श्री श्री जगन्नाथ महाप्रभु के साथ नारियों में श्रेष्ठा श्री स्वरूपा रुक्मिणी महादेवी का विवाह उत्सव ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष एकादशी को श्री मंदिर के भीतर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विधि-विधान से संपन्न होगा। द्वापर युग में जिस प्रकार श्री द्वारिकाधीश ने राजा भीष्मक की पुत्री देवी रुक्मिणी को नाटकीय ढंग से हरण किया था, उसी लीला को श्रीमंदिर के भीतर प्रतीकात्मक 'रुक्मिणी हरण नीति' के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। इस प्रकार लक्ष्मी-नारायण का यह पावन विवाह उत्सव भक्तों की उपस्थिति में अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ आयोजित होगा। परंपरा के अनुसार, इस दिन महाप्रभु जी की कई विशेष नीतियां और अनुष्ठान संपन्न होते हैं: प्रेम पत्र (चिटाऊ) लेखन: श्रीदेवी के महास्नान और मार्जना के बाद, उनके श्रीहस्त (हाथ) का स्पर्श कराकर 'तढ़ाऊ करण' सेवक द्वारा प्रेम पत्र लिखा जाता है। रुक्मिणी हरण: माता विमला के मंदिर से लौटते समय श्री मदनमोहन जी, श्रीदेवी का हरण करते हैं। शिशुपाल पराजय: महाप्रभु शिशुपाल को पराजित कर रथ से बांध देते हैं और बाद में बड़ा ठाकुर श्री बलराम आकर उसे बंधन मुक्त करते हैं। शुभ विवाह: संध्या आरती और महास्नान के बाद, विवाह मंडप में पूजापंडा सेवकों द्वारा वैदिक रीति-रिवाज से महाप्रभु और श्रीदेवी का शुभ विवाह संपन्न होता है। अनुरोध: अतः सभी भक्तों से विनम्र निवेदन है कि वे जगतपिता और जगतमाता के इस दिव्य विवाह उत्सव में उपस्थित रहकर महाप्रभु और महामायी का आशीर्वाद प्राप्त करें, तथा विवाह की संध्या को दिव्य महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य करें। जय मां महालक्ष्मी | जय जगन्नाथ! 🙏✨

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