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Rama Devi Sahu

195 days ago

🙏आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र 🙏 किसी भी मंदिर में या हमारे घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अनिवार्य रूप से किया जाता है, सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जब भी आरती पूर्ण होती है तो यह मंत्र विशेष रूप से बोला जाता है l कर्पूरगौरं मंत्र : कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् l सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ll ✳️ये है इस मंत्र का अर्थ ... इस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जाती है। इसका अर्थ इस प्रकार है : कर्पूरगौरं-कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं-करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। संसारसारं-समस्त सृष्टि के जो सार हैं। भुजगेंद्रहारम्-इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि-इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है। मंत्र का पूरा अर्थ :- जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव, माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है। यही मंत्र क्यों…? किसी भी देवी-देवता की आरती के बाद कर्पूरगौरम् करुणावतारं….मंत्र ही क्यों बोला जाता है, *इसके पीछे बहुत गहरे अर्थ छिपे हुए हैं। भगवान शिव की ये स्तुति शिव-पार्वती विवाह के समय "भगवान-विष्णु" द्वारा गाई हुई मानी गई है। अमूमन ये माना जाता है कि शिव शमशान वासी हैं, उनका स्वरुप बहुत भयंकर और अघोरी वाला है। लेकिन, ये स्तुति बताती है कि उनका स्वरुप बहुत दिव्य है। शिव को सृष्टि का अधिपति माना गया है, वे मृत्युलोक के देवता हैं, उन्हें पशुपतिनाथ भी कहा जाता है, पशुपति का अर्थ है संसार के जितने भी जीव हैं (मनुष्य सहित) उन सब का अधिपति। ये स्तुति इसी कारण से गाई जाती है कि जो इस समस्त संसार का अधिपति है, वो हमारे मन में वास करे। शिव श्मशान वासी हैं, जो मृत्यु के भय को दूर करते हैं। हमारे मन में शिव वास करें, मृत्यु का भय दूर हो। विशेष== आचार्य चाणक्य के अनुसार हमारे सभी देवी देवता हमारी अनुभूति है ! दूसरे शब्दों में कहे तो हमारे सुविचार ही हमारे देवता है ! ये देवता आहार से मनुष्य के महतत्व में उत्पन्न होते है ! देवाधिदेव महादेव भी तत्व रूप में गाय के दूध में ११ रूद्र है ! गाय का दूध पीकर हम भगवान् शिव को धारण ( Perception of mind ) कर सकते है ! इसीलिए ५ अमृत में से एक अमृत है देसी गाय का दूध !

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Comments (4)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 16, 2026

Koi baat nhi Jii... Jo bhi hua Acha hi Hua...🙏 Shubha Dopahar Jii 🌹🌹

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 16, 2026

dhanyawad baccha galti se paste hogaya aapko dhanyawad correction karne 🙏subh din ki kammnay chalo jaap karne

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 16, 2026

Aaj Anant Chaturdashi nhi hai... Aaj Shiv Chaturdashi Vrat hai ..! Jo bhi ho, Vishnu Bhagwan ki Prati Aastha or Vishwas ke Sath Sajha krne ke liye Bahut Bahut Dhanyawad Jii 🙏 Aap ka Har Sapna Saakar ho 🌹🌹

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 16, 2026

अनंत चतुर्दशी के मुख्य विवरण: पूजनीय भगवान: भगवान विष्णु। व्रत और पूजा: इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि, मनोवांछित फल और पापों से मुक्ति मिलती है। अनंत सूत्र का महत्व: 14 गांठों वाला रक्षा सूत्र भगवान के 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। गणेश विसर्जन: यह गणेश उत्सव का आखिरी दिन होता है, जिसे 'गणेश चौदस' भी कहते हैं। पौराणिक कथा: पांडवों को महाभारत युद्ध में विजय पाने के लिए भगवान कृष्ण ने यह व्रत करने की सलाह दी थी। यह त्योहार भगवान विष्णु की अनंत कृपा और सुरक्षा के प्रति आस्था का प्रतीक है।