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देह की आंतरिक महिमा 💐💐💐💐💐💐 हमारा देह ब्रह्मांडीय उर्जा से भरा हुआ खजाना है । इसमे समस्त प्रकार की स्ट्रांग उर्जा निरंतर प्रवाह करती रहती है । हम जब अपनी शाक्ति और उर्जा का आंतरिक आंकलन करना प्रारम्भ करते है । तो पाते है कि अनेक रश्मिया अंदर और बाहर भ्रमण कर रही होती है। सकारात्मक ऊर्जा ऊर्ध्वगमन करती है हमारे आज्ञा चक्र को दिव्य ज्ञान और प्रकाश पुंज से युक्त कर एक सादगी और उत्तम कार्य की दिशा मे मार्गदर्शक बनकर उपस्थित हो जाती है । यहां अंहकार समाप्त हो जाता है मनुष्य का ऐसा स्वरूप प्रकट हो जाता है कि वह स्वयं आश्चर्य चकित हो जाता है । अपने साथ साथ अनेक लोगो का प्रतिनिधित्व कर मन को एकाग्र कर कर्म करता हुआ सत्य पथ का अनुगामी बनते चला जाता है । 🌹🌹🌹🌹 दूसरी ओर नकारात्मक उर्जा निम्न गामी होकर कर्म करवाती है । व्यक्ति को पहले मनुष्य से पशुता की ओर ले जाती है । संसार के लिए अहित कारी कार्य कर अपना जीवन और अन्य लोगो के जीवन का नष्ट भ्रष्ट करने का हर सम्भव प्रयास करती है । और एक दिन अंधकार मे सदा सदा के लिए बदनाम होकर विलुप्त हो जाती है । 💐🌹💐🌹 देह एक Bio-Magnetic Field बनाता है,। जिसे सामान्य भाषा में Aura या Energy Field कहा जाता है। हमारा मन , तनाव ग्रस्त होकर (Stress), और आपका इरादा (Intention) सब मिलकर इस ऊर्जा-क्षेत्र में vibrations पैदा करते हैं। 💐🌹💐🌹 भावनाएँ (Emotions) भी एक विशेष frequency पर काम करती हैं: 🌹🌹🌹 बारम्बार भावनात्मक आवृति 💐🌹💐🌹 (प्रेम) सबसे उच्च Vibrational frequency Peace (शांति) Balanced frequency Anger (क्रोध) Scattered/Unstable frequency Fear (भय) सबसे निम्न frequency 💐🌹💐🌹 यही frequencies हमे परिस्थितियों, अनुभवों और लोगों से जोड़ती या दूर करती हैं। 💐🌹💐🌹 हम जैसे होते हैं, वैसी ही ऊर्जा हमसे बाहर प्रवाहित होती है। और वैसी ही ऊर्जा वापस आकर्षित होकर हमारी ओर लौटती है। 💐🌹💐🌹 हम जैसा सोचते हैं, वैसी ही हमारे ब्रेन की frequency बदल जाती है। जब ब्रेन की frequency बदलती है, तो हमारे देह हमारी भावनाएँ, और हमारे निर्णय बदल जाते हैं। अगर भीतर प्रेम, शांति और विश्वास की ऊर्जा है तो जीवन में चमत्कार स्वाभाविक रूप से घटते हैं। 💐🌹💐🌹 लेकिन अगर भीतर भय, क्रोध, संदेह और नकारात्मकता है तो जीवन संघर्ष और बाधाओं से भर जाता है। 💐🌹💐🌹 हम विश्वास के साथ हमारे देह और इन्द्रिय पर ,मन,बुद्धि-विवेक, से कुछ ध्यान केंद्रित कर अपनी योग्यतानुसार अपने सक्षमता का सदुपयोग करे । निर्णय लेना होता संसारिक कार्य के लिए वे सब कहीं ना कहीं अपने हित के लिए होते है । ठीक भी है एक अच्छा जीवन यापन हो यही सर्वोत्तम साधन और मार्ग है। किन्तु हमारा देह यदि मंदिर के जैसे माना जाए । और इसमे विराजमान दिव्य ईश्वर की महान कृपा अनुभूत की जाए। हम केवल अपने लिए ही नही बल्कि सबके लिए बने है । जहां सब आ जा सकते है । मदिर है हम जहां साकारात्मक ऊर्जा-क्षेत्र है । जिस दिन यह ज्ञात हुआ उस दिन हम ब्रह्मांडीय उर्जा हो जाते है । और संसार के एक प्रकाश पुंज की तरह काम करना प्रारम्भ कर देते है। कृपा ऐसा कर के देखे जय श्रीकृष्ण 💐🌹💐🌹🙏🙏🙏 डा रवींद्र खरे नागपुर

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Comments (1)

Balraj Sethi Balraj Sethi

Balraj Sethi Balraj Sethi

Nov 23, 2025

Om Surya Devta Ji Ko Koti Koti Bar Parnam Ji. 🙏🏻🍁