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Rama Devi Sahu

179 days ago

जब प्रेम अपनी चरम सीमा पर पहुँचता है, तब वहाँ अहंकार का कोई स्थान नहीं रह जाता। यह दृश्य उसी दिव्य प्रेम का प्रतीक है — जहाँ स्वयं श्रीकृष्ण, जो समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं, वे भी राधा के चरणों में शरण लेकर प्रेम की पराकाष्ठा को प्रकट करते हैं। यह केवल प्रणाम नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सच्चे प्रेम में ऊँच-नीच, अधिकार और अहंकार सब मिट जाते हैं। राधा के चरणों में झुका कृष्ण यह बताता है कि जहाँ प्रेम है, वहाँ प्रभु भी भक्त बन जाते हैं। राधा केवल नाम नहीं, वह कृष्ण के हृदय की धड़कन हैं; और कृष्ण का यह भाव कहता है — “प्रेम वही है, जहाँ मैं नहीं… केवल तुम हो।” राधे राधे ❤️🙏

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 6, 2026

🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 Subha Sandhya Vandan 🌹🌹