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महावीर स्वामी की जीवनी बड़ी ही प्रेरणादायक है. संगम देव ने अकारण कष्ट दिए, 6 महीने लगातार... भगवान महावीर ने कभी उसका कोई अहित चिंतन तक नहीं किया था, वो तो ध्यान में लीन रहे, सिद्ध अवस्था न होते हुवे भी सिद्ध जैसी ही अवस्था ही उनकी रही! अहो! ऐसे अनुपम महावीर स्वामी को एक नमस्कार करना.... स्वयं को सिद्ध क्षेत्र का अधिकारी बनाना है! जितनी बार प्रभु महावीर का स्मरण आता है, तब शरीर से संबंधित कोई भी कष्ट आया हो, सहन करने की भी सोच न होकर उसे सहज मान कर ध्यान में लीन होने की प्रेरणा मिलती है. ऐसे महावीर स्वामी के काल में कम से 1 अरब से अधिक साधू होंगे... उससे अनेक गुणा अधिक श्रावक होंगे... ये सब नवकार को ग्रहण करेंगे.. नमुत्थुणं और अन्य स्तोत्र पढ़ेंगे... सिद्धाणं बुद्धाणं का पाठ पढ़ेंगे... इक्कोवि नमुक्कारो... महावीर स्वामी की किया गया एक नमस्कार! मेरी आत्मा का कल्याण करेगा... ये भाव! अन्य किसी भव में पहले नहीं मिला! अब मिला... जय महावीर! महावीर मेरा पंथ Jainmantras.com

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