
बद्रीप्रसादअसाटी
309 days ago
ईश्वर अंश जीव अविनाशी 🌹🌹🌹🌹🌹 महाराज तुलसीदास जी की एक चौपाई रामचरितमानस मे लिखी हुई है । जीव आत्मा के लिए कहा गया है । वह ईश्वर का अंश कहा गया है । ईश्वर और आत्मा दोनो ही अविनाशी है । देह को मिट्टी कहा गया है ।वह जन्मती और मृत होती रहती है । और सृष्टिकाल से सभी देह परिवर्तन शील है । 🌹🌹🌹🌹 धर्म, आध्यात्म, और विज्ञान, 💐💐💐💐 धर्म का अर्थ है कि जीवन जीने के नियम जिसे साधारणत सभी अपने अपने मतानुसार पालन करते है । संसार मे अनेक धर्म है ।जो मनुष्य पर लागू होते है । और भेदभाव उत्पन्न करते है । 🌹🌹🌹🌹 आध्यात्म का धर्म से कोई संबंध नही होता ।क्योकि वह ईश्वर ,प्राकृतिक, और आत्मा, से संबंधित है। जिसका ना कोई नाम, रंग,रूप, आकार प्रकार, होता है । यह अनुभूति और अनुभव से देखा जाता है । वही ईश्वर और आत्मा अविनाशी है। 🌹🌹🌹🌹 विज्ञान 💐🌹💐🌹 विज्ञान एक प्राकृतिक खोज है ।और प्रमाण सहित सिद्ध करता है । जो प्रत्यक्ष होता है वही विज्ञान है । अपनी स्वीकृती की मोहरा लगाता है ।नये नये प्रयोग कर मानवीय जीवन यापन के लिए अनेक प्रकार की सुविधाजनक वस्तु विशेष प्रदान करता है । खोजी तो विज्ञान भी है और आध्यात्म भी है । 💐💐💐💐💐 आध्यात्म यदि आचरण मे उतर जाए तो सभी मनुष्य की एकता होगी। जहां जाति,धर्म, भाषा,प्रदेश, देश,का बंधन समाप्त होजाता है । भेद कुछ भी शेष ना रहे वही अविनाशी की बात कही है ।संत ने। किन्तु आज क्या हो रहा है 💐🌹 आचरण मे इतने सस्ते हम पीठ पीछे एक दूसरे को डसते है हम। 💐🌹💐🌹 किसी कवि की पंक्ति है । जय श्रीकृष्ण 🙏🙏🙏🙏🙏

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Oct 26, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 🌹🌹

बद्रीप्रसादअसाटी
Oct 25, 2025
सीताराम चरण रति मोरे अनुदिन बढ़हिं अनुग्रह तोरे
