
Rama Devi Sahu
3 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 31 अक्टूबर 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - हेमंत* *⛅मास - कार्तिक* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - षष्ठी शाम 04:57 तक तत्पश्चात् सप्तमी* *⛅नक्षत्र - आर्द्रा सुबह 07:12 तक, तत्पश्चात् पुनर्वसु प्रातः 05:39 नवंबर 01 तक, तत्पश्चात् पुष्य* *⛅योग - सिद्ध शाम 05:31 तक तत्पश्चात् साध्य* *⛅राहुकाल - सुबह 09:21 से सुबह 10:46 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:31* *⛅सूर्यास्त - 05:49 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:50 से प्रातः 05:41 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:45 से मध्यरात्रि 12:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - त्रिपुष्कर योग (शाम 04:57 से प्रातः 05:39 नवम्बर 01 तक)* *🌥️विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* ✨ दशरथ विषाद सर्ग 4 📜 🔴 वाल्मीकिजी📜 बोले🗣️, हे भारद्वाज🙏! जब इस प्रकार राजा👑 ने कहा तो मुनियों🧘♂️ में शार्दूल विश्वामित्रजी ऐसे प्रसन्न😊 हुए जैसे चन्द्रमा🌕 को देखकर क्षीरसागर🌊 उमड़ता है । उनके रोम खड़े हो आये और कहने लगे, हे राजशार्दूल! तुम धन्य✨ हो! ऐसे तुम क्यों न कहो । 🔴 तुम्हारे में दो गुण हैं-एक तो यह कि तुम रघुवंशी हो और दूसरे यह कि वशिष्ठजी🙏 जैसे तुम्हारे गुरु हैं जिनकी आज्ञा📜 में चलते हो । अब जो कुछ मेरा प्रयोजन🎯 है वह प्रकट करता हूँ । मैंने दशगात्र यज्ञ🔥 का आरम्भ किया है, जब यज्ञ करने लगता हूँ तब खर और दूषण निशाचर👹 आकर विध्वंस💥 कर जाते हैं और माँस🥩 हाड़🦴 और रुधिर🩸 डाल जाते हैं जिससे वह स्थान यज्ञ करने योग्य नहीं रहता और जब मैं और जगह जाता हूँ तो वहाँ भी वे उसी प्रकार अपवित्र❌ कर जाते हैं इसलिये उनके नाश करने के लिये मैं तुम्हारे पास आया हूँ🚶♂️ । 🔴 कदाचित् यह कहिये कि तुम भी तो समर्थ💪 हो, तो हे राजन्👑! मैंने जिस यज्ञ का आरम्भ किया है उसका अंग क्षमा😌 है । जो मैं उनको शाप⚡ दूँ तो वह भस्म🔥 हो जावें पर शाप क्रोध😠 बिना नहीं होता । जो मैं क्रोध करूँ तो यज्ञ निष्फल❌ होता है और जो चुपकर रहूँ तो राक्षस👹 अपवित्र वस्तु डाल जाते हैं । इससे अब मैं आपकी शरण में आया हूँ । 🔴 हे राजन्! अपने पुत्र👦 रामजी🙏 को मेरे साथ भेज दो, वह राक्षसों को मारें⚔️ और मेरा यज्ञ सफल हो । यह चिन्ता🤔 तुम न करना कि मेरा पुत्र अभी बालक है । यह तो इन्द्र के समान शूरवीर🦁 है । जैसे सिंह के सम्मुख मृग🦌 का बच्चा नहीं ठहर सकता वैसे ही इसके सम्मुख राक्षस न ठहर सकेंगे । इसको मेरे साथ भेजने से तुम्हारा यश🌟 और धर्म दोनों रहेंगे और मेरा कार्य⚙️ होगा इसमें सन्देह नहीं । 🔴 हे राजन! ऐसा कार्य त्रिलोकी🌌 में कोई नहीं जो रामजी न कर सकें इसलिये मैं तुम्हारे पुत्र को लिये जाता हूँ यह मेरे हाथ✋ से रक्षित🛡️ रहेगा और कोई विघ्न न होने दूँगा । जैसे तुम्हारे पुत्र हैं मैं और वशिष्ठजी जानते🧠 हैं । और ज्ञानवान्💡 भी जो त्रिकाल दर्शी👁️ हैं जानेंगे और किसी की सामर्थ्य नहीं जो इनको जानें । 🔴 हे राजन् जो समय⏳ पर कार्य होता है वह थोड़े ही परिश्रम💪 से सिद्ध🎯 होता है और समय बिना बहुत परिश्रम करने से भी नहीं होता । खर और दूषण प्रबल दैत्य👹 हैं, मेरे यज्ञ को खण्डित करते हैं । जब रामजी जावेंगे तब वह भाग🏃♂️ जावेंगे इनके आगे खड़े न रह सकेंगे । जैसे सूर्य☀️ के तेज से तारागण✨ का प्रकाश क्षीण📉 हो जाता है वैसे ही रामजी के दर्शन से वे स्थित न रहेंगे । इतना कहकर वाल्मीकिजी बोले हे भारद्वाज! जब विश्वामित्रजी ने ऐसा कहा तब राजा दशरथ चुप होकर गिर पड़े और एक मुहूर्त्त पर्यन्त पड़े रहे । 🔴 इति श्रीयोगवाशिष्ठे वैराग्य प्रकरणे दशरथ विषादो नाम चतुर्थस्सर्गः ॥४॥ 🌺 *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Oct 31, 2026
🙏 जय श्री राधेकृष्ण जी 🙏 सुप्रभात 🌹🌹

Savita om namah shivay 🙏🌹
Oct 31, 2026
Radhe radhe 🙏🌹 jai shree krishna ji

Rama Devi Sahu
Oct 31, 2026
💐Good morning 🌺शुभ प्रभात 🌿🍁 🪷राधे राधे 🌹🌹

Shah 🩷
Oct 31, 2026
🌄 शुभ प्रभात 🌄 🪷 जय श्री राधे कृष्ण 🪷
