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Rama Devi Sahu

334 days ago

... ︵︷︵︷︵︷︵︷︵︷︵ ♡ अगर समझा ही नहीं ♡ तो पढ़ा क्या ? ❓ और अगर .... जीवन में नहीं अपनाया तो समझा क्या ?? ❓ ︶︸︶︸︶︸︶︸︶︸︶ अरे सनातनियों ..!! तुम किसे धर्म मानते हो ? क्या तुम नहीं जानते कि उपासना का फल कर्मकाण्ड से लाख गुणा है. कोरा कर्मकाण्ड तुम्हारे क्या काम आएगा ? जरा विचार करो ..... सनातन धर्म कहाँ कमजोर हो रहा है ? जगत में कीमती से कीमती जो ज्ञान होना सम्भव है, वह सब सनातन धर्म के शास्त्रों के रूप में हमारे पास है, फिर भी निश्चयात्मिका बुद्धि क्यों नहीं हो रही है ? क्योंकि शास्त्र तो हैं, पढ़े भी खूब जा रहे हैं, पर उनका अर्थ हमारे जीवन में नहीं उतर रहा है. ❗ ध्यान दें, शास्त्र वाक्य बुदबुदाने के लिए नहीं हैं, समझने के लिए हैं. यह जो बार-बार पढ़ने का आग्रह किया जाता है, वह इसीलिए कि वास्तविक बात समझ में आ जाए. लेकिन जो मनुष्य ... शास्त्र के कोरे पाठ करने में हीे अपने कर्तव्य की इतिश्री मान रहा है, उसका कल्याण कैसे होगा ? केवल मात्र पढ़ लेना पाठ करना नहीं है. पाठ के तीन अंग हैं, पठन, मनन, निधिध्यासन. पहले पढ़ो, फिर किसी संत से उसका वास्तविक अर्थ समझो, फिर उसका खूब मनन करके जीवन में उतारो, तब तो कोई बात बने. अगर समझा ही नहीं तो पढ़ा क्या ? और जीवन में नहीं उतरा तो समझा क्या ? एक चौपाई है ~ प्रबिसि नगर कीजे सब काजा ! हृदय राखि कोसलपुर राजा !! हनुमानजी ने तो भगवान को हृदय में रखकर लंका में प्रवेश किया. तुम कहीं प्रवेश करते हो तो हृदय में राम को नहीं, काम को रखते हो और जीभ पर चौपाई रखते हो. दूसरा उदाहरण ~ "प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि। जलधि लांघि गए अचरज नाहिं॥ अर्थात .... हनुमान जी ने सागर पार कर लिया, तो हैरानी क्या ? यह तो सोचो .... कि उनके मुख में क्या था ? उनके मुख में राम नाम रूपी मुद्रिका थी. वही मुद्रिका, यानी भगवान का नाम, तुम अपने मुख में रख लो, तुम भी पार हो जाओगे. इसमें क्या शंका है ? यहाँ हनुमानजी की महिमा कम नहीं है, क्योंकि ... नाम तो लाखों लेकर चलते हैं, पर प्रमादवश उसे रास्ते में ही गिरा देते हैं. हनुमानजी ने अनेक बाधाएँ आने पर भी उसे गिराया नहीं, ले जाकर भक्ति देवी के चरणों में डाल दिया और भगवद्प्रेम पा लिया. आपने , चौपाई तो लाख बार दोहरा ली, नाम कितना जपा ? तुम ही बताओ, कल्याण नाम जपने से होगा, या चौपाई दोहराने से ? ┄┅════❁ 🙏 ❁════┅┄ ︵︷︵︷︵︷︵︷︵︷︵

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