
Rama Devi Sahu
5 days ago
"मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजर बिहारी।" "दीन दयाल बिरिदु संभारी, हरहु नाथ मम संकट भारी।" अर्थ: हे मंगल के धाम और अमंगल (दुख/कष्ट) का नाश करने वाले! अयोध्या के बासी, दशरथ नंदन श्री राम मुझ पर कृपा करें। हे दीनों पर दया करने वाले, अपने भक्तों की लाज रखने वाले और उनके दुख समझने वाले प्रभु! हे नाथ, मेरे इस बड़े संकट को दूर कर दीजिए।
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